LAW'S VERDICT

आदेश को अनदेखा कर जूनियर को प्रमोशन देने पर हाईकोर्ट ने PWD के ENC को किया तलब

वरिष्ठता सूची में सुधार किए बिना जूनियर को प्रमोशन देने का मामला; हाईकोर्ट ने मांगा शपथपत्र, आदेश के अनुपालन की देनी होगी जानकारी

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़ | जबलपुर

मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने PWD के इंजीनियर-इन-चीफ को 9 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। उन्हें अपने साथ इस मामले से संबंधित शपथपत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

मामला सागर में रहने वाले विभाग में असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर पदस्थ उमाशंकर तिवारी की वरिष्ठता से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता उमाशंकर तिवारी की आरोप है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद उसकी वरिष्ठता सूची में सुधार नहीं किया गया और इसके बाद 31 जुलाई 2026 को उनसे जूनियर कर्मचारियों को पदोन्नति दे दी गई।

हाईकोर्ट के पुराने आदेश का नहीं हुआ पालन

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर शर्मा और अधिवक्ता अभय प्रताप सिंह ने बेंच को बताया कि PWD के इंजीनियर इन चीफ ने 31 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया, जो हाईकोर्ट के 17 जुलाई 2025 के पूर्व आदेश के विपरीत है। इतना ही नहीं, इसी मुद्दे को लेकर कंटेम्प्ट पिटीशन (सिविल) नंबर 6478/2025 पहले से लंबित है और उसकी सुनवाई के दौरान ही विभाग ने विवादित पदोन्नतियां कर दीं। हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश का अवलोकन करते हुए उसमें दिए गए निर्देशों को रिकॉर्ड पर लिया।

याचिकाकर्ता को मिलना था उचित स्थान 

हाईकोर्ट ने WP No. 4742/2021 में 17 जुलाई 2025 को आदेश पारित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता को 25 अप्रैल 2012 को PWD के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा जारी आदेश क्रमांक 1104 के अनुसार वेतन और ग्रेडेशन लिस्ट में उचित स्थान दिया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई आदेश की प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरी की जाए। अब याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस आदेश का वास्तविक रूप से पालन नहीं किया गया।

31 जुलाई को कर दी गईं पदोन्नतियां

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन और वरिष्ठता सूची में सुधार का विवाद लंबित होने के बावजूद विभाग ने 31 जुलाई 2026 को विभिन्न सब-इंजीनियरों को उच्च पद पर पदोन्नत कर दिया। उनका दावा है कि यदि याचिकाकर्ता की वरिष्ठता हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप सही कर दी जाती तो वे मौजूदा सूची में काफी ऊपर होते और पदोन्नति के लिए उनके दावे पर भी विचार किया जाना चाहिए था।

इंजीनियर-इन-चीफ को अब देना होगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए PWD, मध्य प्रदेश के इंजीनियर-इन-चीफ को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। उन्हें 9 सितंबर 2026 को कोर्ट में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि 17 जुलाई 2025 के आदेश का पालन किस प्रकार किया गया और वरिष्ठता सूची को लेकर क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने इंजीनियर-इन-चीफ को इस संबंध में शपथपत्र के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

 

हाईकोर्ट का आदेश देखें      WP-32461-2026

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