जबलपुर के ओमती थाने के FIR 257/2023 से जुड़ा मामला; गवाहों को दोबारा बुलाने और हैंडराइटिंग एक्सपर्ट रिपोर्ट पर अभियोजन के बदले रुख के बाद मिली राहत
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़ | नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर के ओमती थाना क्षेत्र से जुड़े FIR नंबर 257/2023 के मामले में याचिकाकर्ता हाजी अब्दुल रज्जाक को नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अभियोजन पक्ष के रुख में आए बदलाव और ट्रायल में संभावित देरी को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। रज्जाक की ओर से अधिवक्ता पवन रेले, अनमोल खेता और शरिक़ अकील फारूकी ने पैरवी की।
27 जुलाई को अभियोजन ने दिया था आश्वासन
मामले की पिछली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को हुई थी। उस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि ट्रायल को जल्द पूरा कराने के लिए अभियोजन पक्ष गवाहों को दोबारा बुलाने से संबंधित आवेदन पर आगे नहीं बढ़ेगा। यह आवेदन धारा 311 CrPC / धारा 348 BNSS के तहत दायर किया गया था। अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया था कि सह-आरोपी से संबंधित हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट के कारण ट्रायल को रोका नहीं जाएगा।
अगली सुनवाई में बदला अभियोजन का रुख
हालांकि, ताजा सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने अपने पूर्व रुख से अलग रुख अपनाया। अभियोजन ने कहा कि वह गवाहों को दोबारा बुलाने संबंधी आवेदन पर आगे बढ़ना चाहता है। इसके साथ ही अभियोजन ने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड पर लाने की बात कही। अभियोजन के रुख में इस बदलाव से ट्रायल में और देरी की संभावना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को नियमित जमानत देने का फैसला किया।
ट्रायल में देरी को लेकर कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ट्रायल पूरा करने के लिए तय की गई समय-सीमा और अभियोजन की ओर से दिए गए अंडरटेकिंग को समाप्त कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने आरोपी के लिए भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता स्वयं ट्रायल में देरी करने का प्रयास करता है, तो अभियोजन पक्ष या ट्रायल कोर्ट इस संबंध में उचित आदेश के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
ट्रायल कोर्ट की शर्तों पर होगी रिहाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हाजी अब्दुल रज्जाक को ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों पर नियमित जमानत पर रिहा किया जाएगा। इस तरह मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश मुख्य रूप से अभियोजन पक्ष द्वारा पिछली सुनवाई में दिए गए आश्वासन से पीछे हटने और इससे ट्रायल में संभावित देरी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आया है।
मामले की प्रमुख बातें
- मामला ओमती थाना, जबलपुर के FIR नंबर 257/2023 से संबंधित है।
- सुप्रीम कोर्ट ने हाजी अब्दुल रज्जाक को नियमित जमानत दी।
- 27 जुलाई को अभियोजन ने गवाहों को दोबारा बुलाने की अर्जी पर आगे नहीं बढ़ने का आश्वासन दिया था।
- बाद की सुनवाई में अभियोजन ने अपना रुख बदल दिया।
- अभियोजन हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड पर लाना चाहता है।
- ट्रायल में संभावित देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी।
- आरोपी को ट्रायल कोर्ट की शर्तों के अनुसार रिहा किया जाएगा।
- यदि आरोपी ट्रायल में देरी करता है तो अभियोजन या ट्रायल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
