7000 वर्गफीट खाली जमीन बचाने को लेकर दाखिल हुई जनहित याचिका खारिज
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़ | जबलपुर
जबलपुर में शिव मंदिर के पास पुराने गुलौआ तालाब के आगे हॉकर जोन से लगी हुई करीब 7000 वर्गफीट खाली जमीन को संरक्षित रखने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका में पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक (राकेश सिंह) और महापौर (जगत बहादुर सिंह अन्नू) को पक्षकार बनाया गया था। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने माना कि जिस निर्माण का विरोध किया जा रहा है, वह बड़े पैमाने पर पक्का निर्माण नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जनता की सुविधा के लिए केवल जमीन के एक छोटे हिस्से में अस्थायी शेड बनाया जा रहा है, इसलिए इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
7000 वर्गफीट जमीन बचाने की मांग
यह जनहित याचिका ओमप्रकाश तिवारी ने जनहित में दायर की थी। याचिका में शिव मंदिर के पास स्थित करीब 7000 वर्गफीट खाली स्थान को स्थानीय निवासियों के लिए सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार यह स्थान गुलौआ चौक के पास बनाए गए हॉकर जोन की जमीन से लगा हुआ है, जो इंदिरागांधी वार्ड, वीर सावरकर वार्ड, रानी दुर्गावती वार्ड और गढ़ा वार्ड के निवासियों के उपयोग में है। याचिका में दावा किया गया था कि यह क्षेत्र करीब 154 वर्षों से खाली है और वहां मौजूद पेड़ों का उपयोग बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं लंबे समय से करते आ रहे हैं।
3000 वर्गफीट में सामुदायिक भवन बनाने का आरोप
याचिकाकर्ता का आरोप था कि ठेकेदार ने करीब 3000 वर्गफीट जमीन पर ‘सामुदायिक भवन’ का निर्माण शुरू कर दिया है। इससे खुले क्षेत्र और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। याचिका में कहा गया कि यदि निर्माण की अनुमति दी गई तो स्थानीय लोगों के लिए उपलब्ध खुली जमीन समाप्त हो जाएगी। इसी आधार पर निर्माण कार्य रोकने की मांग हाईकोर्ट से की गई थी।
प्रशासन ने बताया- बनेगा अस्थायी शेड
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह ने डिवीज़न बेंच को बताया कि वहां स्थायी सामुदायिक भवन का निर्माण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 के आदेश से शेड निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है और इसके लिए 24.46 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। प्रस्तावित शेड में MS ट्यूबुलर सेक्शन, प्री-कोटेड गैल्वनाइज्ड आयरन प्रोफाइल शीट, ईंट का काम और कोटा स्टोन स्लैब फ्लोरिंग जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। श्री रूपराह के अनुसार यह शेड बारिश और गर्मी के मौसम में आम जनता के उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा।
‘पक्का निर्माण नहीं हो रहा’
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध तस्वीरों का भी अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि निर्माण के लिए केवल जमीन के एक छोटे हिस्से का उपयोग किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित निर्माण कोई पक्का सामुदायिक भवन नहीं है, बल्कि अस्थायी शेड है और इससे खुले क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ता हुआ नहीं दिख रहा। अदालत ने यह भी कहा कि जो काम जनता के लाभ के लिए शुरू किया गया है, उसमें रिट क्षेत्राधिकार के तहत हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
