MP High Court ने अपीलें खारिज कर सिंगल बेंच का फैसला रखा बरकरार; कहा- संशोधित मेरिट सूची ही होगी मान्य
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़ | जबलपुर
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में बोनस अंकों को लेकर चल रहे विवाद में उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अब भर्ती प्रक्रिया में संशोधित मेरिट सूची ही मान्य होगी। इसके साथ ही ऐसे उम्मीदवारों के बोनस अंक हटाए जाएंगे, जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते थे।
सिर्फ RCI मान्यता प्राप्त डिप्लोमा पर मिलने थे बोनस अंक
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा की नियम पुस्तिका के अनुसार भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारक उम्मीदवारों को ही 5 प्रतिशत बोनस अंक दिए जाने थे। हालांकि भर्ती प्रक्रिया में सामने आया कि 13,089 पदों के लिए जारी सूची में करीब 14,964 अभ्यर्थियों ने ‘हां’ विकल्प चुनकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार केवल 5,271 अभ्यर्थी ही निर्धारित पात्रता पूरी करते थे। यानी बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को भी बोनस अंक मिल गए, जो निर्धारित पात्रता के दायरे में नहीं आते थे।
सिंगल बेंच ने बिना सत्यापन बोनस अंक देने को माना गलत
इस मामले में जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने बिना प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बोनस अंक दिए जाने को उचित नहीं माना था। सिंगल बेंच ने पात्रता के प्रमाण पत्र अपलोड करने का अवसर देने और सत्यापन के बाद अपात्र पाए जाने वाले उम्मीदवारों के चयन को निरस्त करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ कई उम्मीदवारों ने डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दायर की।
‘भूलवश हां विकल्प चुना’ की दलील नहीं चली
अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने गलती या भूलवश ‘हां’ विकल्प चुन लिया था। इसलिए उन्हें बोनस अंक के बिना सामान्य मेरिट सूची में शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन डिवीजन बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। बेंच ने कहा कि उम्मीदवारों को अपनी गलती सुधारने के लिए तीन अलग-अलग अवसर दिए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिणाम घोषित होने के बाद अपनी गलती का दावा करके भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संशोधित मेरिट सूची ही होगी मान्य
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया में अब संशोधित मेरिट सूची को ही अंतिम आधार माना जाएगा। इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जिन्होंने बिना निर्धारित पात्रता के 5 प्रतिशत बोनस अंक का लाभ लेकर मेरिट में स्थान बनाया था। ऐसे उम्मीदवारों के बोनस अंक हटने के बाद मेरिट सूची में बदलाव होगा और उसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
तीन मौके मिलने के बाद भी नहीं सुधारी गलती
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी महत्वपूर्ण माना कि उम्मीदवारों को गलती सुधारने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद जिन्होंने समय रहते अपने विकल्प या दस्तावेजों में सुधार नहीं किया, वे बाद में परिणाम आने के बाद इसका लाभ नहीं मांग सकते। इस फैसले से प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 की संशोधित मेरिट सूची तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है। मामले में अनावेदकों की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने पैरवी की।
