LAW'S VERDICT

Assistant Professor Promotion: जूनियर को प्रमोशन देने पर हाईकोर्ट सख्त, यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश

सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पदोन्नति का मामला; हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, डीन और प्रमोशन कमेटी से मांगा जवाब

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़ | जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सागर के शासकीय बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में डिमॉन्स्ट्रेटर से असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को लेकर उठे विवाद में सख्त रुख अपनाया है। वरिष्ठता और पदोन्नति के नियमों की अनदेखी के आरोपों पर जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने राज्य शासन सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इससे फिलहाल विवादित पदोन्नति को लेकर स्थिति में बदलाव पर रोक लग गई है।

जूनियर को प्रमोशन, सीनियर ने दी चुनौती

मामला बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पदस्थ डिमॉन्स्ट्रेटर डॉ. रुचि अग्रवाल की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह विभाग में अधिक मेरिटोरियस और वरिष्ठ हैं। इसके बावजूद उनसे जूनियर कर्मचारी को असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दे दी गई, जबकि उन्हें पदोन्नति प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। याचिका में पदोन्नति प्रक्रिया की वैधता और उसमें अपनाए गए मानदंडों को चुनौती दी गई है।

13 अंकों के नियम पर विवाद

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी कि डॉ. रुचि अग्रवाल को 13 अंक नहीं मिलने का हवाला देकर पदोन्नति से वंचित किया गया। दलील दी गई कि संबंधित 13 अंकों का नियम वर्ष 2025 में लागू हुआ, जबकि पदोन्नति की प्रक्रिया पुराने नियमों के आधार पर पहले ही शुरू हो चुकी थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद बीच में नए नियम लागू करके उम्मीदवारों के अधिकारों को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में अंतरिम आदेश जारी किया। साथ ही राज्य शासन, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के डीन, माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष और पदोन्नति समिति को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब संबंधित पक्षों के जवाब के बाद हाईकोर्ट यह तय करेगा कि पदोन्नति प्रक्रिया में नए नियमों को लागू करना उचित था या नहीं और वरिष्ठता व मेरिट के आधार पर याचिकाकर्ता के दावे पर किस प्रकार विचार किया जाना चाहिए।

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