जनहित याचिका पर MP हाईकोर्ट का पश्चिम मध्य रेलवे को निर्देश
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
सिंगरौली जिले के सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से कोयले की डंपिंग हटाने के निर्देश मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिए हैं। मंगलवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने पश्चिम मध्य रेल प्रशासन को प्लेटफॉर्म खाली कराने का अंतरिम आदेश दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्टेशन के मुख्य प्लेटफॉर्म पर गौतम अडानी की कंपनी ACC limited द्वारा यात्रियों की सुविधाओं के लिए निर्धारित स्थान का इस्तेमाल लंबे समय से कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए किया जा रहा है। इससे स्टेशन परिसर में प्रदूषण बढ़ने के साथ यात्रियों और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
तीन महीने की अनुमति, तीन साल से जारी कोयले का कारोबार
यह जनहित याचिका सिंगरौली जिले के सरई के ग्राम शिवगढ़ निवासी अधिवक्ता विनय जायसवाल की ओर से दायर की गई थी। याचिका में बताया गया कि करीब तीन वर्ष पहले सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 को केवल तीन महीने के लिए कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग के उद्देश्य से ACC Limited को दिया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद पिछले करीब तीन वर्षों से प्लेटफॉर्म पर लगातार कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग की जा रही है। इससे यात्रियों के साथ-साथ आसपास रहने वाले नागरिकों को भी परेशानी और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
प्लेटफॉर्म पर कोयला डंपिंग से प्रदूषण का आरोप
PIL में कहा गया है कि यात्रियों के लिए निर्धारित मुख्य प्लेटफॉर्म पर व्यावसायिक कोयले की लोडिंग और अनलोडिंग की जा रही है, जबकि इस तरह के कार्य के लिए Designated Goods Shed या Freight Terminal जैसी निर्धारित व्यवस्था होनी चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया कि खुले में कोयला रखने और उसकी आवाजाही के दौरान उड़ने वाली Coal Dust स्टेशन परिसर में फैलती है। इससे बच्चों, बुजुर्गों, छात्रों और बीमार लोगों को सांस लेने में परेशानी होने का दावा किया गया है।
यात्रियों को बेंच और वेटिंग शेड का इस्तेमाल करने में परेशानी
याचिका में स्टेशन पर यात्रियों को होने वाली परेशानियों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर कोयले की कालिख और मलबे के कारण यात्री बेंचों पर ठीक से बैठ नहीं पा रहे हैं। इसके अलावा पीने के पानी के बूथ और वेटिंग शेड के प्रदूषित होने की बात भी याचिका में कही गई है। बारिश और रात के समय कोयले की कीचड़ एवं मलबे के कारण यात्रियों के फिसलने और चोटिल होने का खतरा भी बताया गया है।
अनुच्छेद 21 के अधिकार का हवाला
याचिका में स्थानीय नागरिकों और यात्रियों के जीवन के अधिकार तथा स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार का हवाला देते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़ा गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन के लिए बने प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक कोयले की डंपिंग से यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं।
रेलवे की दलील- रोज 741 यात्री आते हैं
मंगलवार को सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने डिवीजन बेंच के समक्ष रेलवे का पक्ष रखा। रेलवे की ओर से बताया गया कि सरई रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 741 यात्री आते हैं। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एसके कश्यप ने रेलवे के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा की तुलना में रेलवे की प्राथमिकता राजस्व अर्जित करना दिखाई देती है।
कोयले से 26.48 करोड़, यात्रियों से 16.46 लाख राजस्व
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री कश्यप ने रेलवे के जवाब का हवाला देते हुए बताया कि यात्रियों से रेलवे को करीब 16 लाख 46 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग से रेलवे को करीब 26 करोड़ 48 लाख रुपए का राजस्व मिला। याचिकाकर्ता की ओर से इस आंकड़े के जरिए यह तर्क रखा गया कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के मुकाबले कोयला लोडिंग-अनलोडिंग से मिलने वाले राजस्व को प्राथमिकता दी जा रही है।
हाईकोर्ट ने दिया प्लेटफॉर्म खाली कराने का अंतरिम आदेश
दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म को खाली कराने का अंतरिम आदेश सुनाया। कोर्ट के निर्देश के बाद अब पश्चिम मध्य रेलवे प्रशासन को प्लेटफॉर्म से कोयले की डंपिंग हटाने की कार्रवाई करनी होगी। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से की गई कार्रवाई और स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा को लेकर उठाए गए कदमों पर भी नजर रहेगी।
