LAW'S VERDICT

बिहार की तर्ज पर मप्र में भी वकीलों के लिए बने कल्याणकारी योजना, हाईकोर्ट ने दिया आवेदन का रास्ता

शहडोल जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश सिंह बघेल ने लगाई थी जनहित याचिका 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर | 

मध्य प्रदेश में बिहार की तर्ज पर बुजुर्ग वकीलों और उनके परिवारों के लिए कल्याणकारी योजना शुरू करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका का मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को निराकरण कर दिया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को स्टेट बार काउंसिल की चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वहां आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि स्टेट बार काउंसिल द्वारा आवेदन निरस्त किया जाता है, तो याचिकाकर्ता उस निर्णय को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

बिहार की योजना का दिया गया हवाला

यह जनहित याचिका शहडोल जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश सिंह बघेल की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि अधिवक्ताओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं संचालित करना स्टेट बार काउंसिल की जिम्मेदारी है। याचिकाकर्ता ने बिहार स्टेट बार काउंसिल द्वारा वर्ष 2012 में शुरू की गई योजना का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की योजना लागू करने की मांग की थी।

35-40 साल वकालत करने वाले अधिवक्ताओं को मिले लाभ

याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश में ऐसे कई अधिवक्ता हैं, जिन्होंने 35 से 40 वर्षों तक वकालत की है। लंबे समय तक न्यायिक व्यवस्था में योगदान देने वाले इन अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को पेंशन तथा अन्य वित्तीय लाभ उपलब्ध कराने के लिए बिहार की तर्ज पर कल्याणकारी योजना शुरू की जानी चाहिए। याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट से स्टेट बार काउंसिल को ऐसी योजना शुरू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा- पहले स्टेट बार काउंसिल में दें आवेदन

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता योगेश सिंह बघेल, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव तथा केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु ने पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि स्टेट बार काउंसिल में चल रही चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद याचिकाकर्ता अपनी मांग को लेकर स्टेट बार काउंसिल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करे। 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बार काउंसिल आवेदन को निरस्त करती है, तो याचिकाकर्ता उस निर्णय को उचित कानूनी माध्यम से चुनौती देने के लिए स्वतंत्र रहेगा। इसी निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। 


हाईकोर्ट का आदेश देखें         WP-16114-2026

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