LAW'S VERDICT

संविलियन से पहले दैवेभो की सेवा पेंशन में जुड़ेगी या नहीं? लार्जर बेंच के फैसले से हजारों कर्मचारियों के लिए खुलेगा रास्ता

दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की Qualifying Service पर हाईकोर्ट में अहम सवाल; प्रदेश के हजारों दैवेभो के लिए अहम साबित होगा फैसला 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पेंशन और अर्हक सेवा (Qualifying Service) से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को लार्जर बेंच के समक्ष भेज दिया है। जस्टिस दीपक खोत की सिंगल बेंच ने यह कदम हाईकोर्ट के चार पूर्व फैसलों में सामने आए विरोधाभासी अभिमतों को देखते हुए उठाया है। अब लार्जर बेंच यह तय करेगी कि नियमितीकरण या नियमित पद पर संविलियन से पहले दैनिक वेतन भोगी के रूप में दी गई सेवा को पेंशन लाभ के लिए अर्हक सेवा में शामिल किया जा सकता है या नहीं। इस फैसले का सीधा असर मध्यप्रदेश के उन हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों (दैवेभो) पर पड़ सकता है, जिनका बाद में नियमितीकरण या संविलियन हुआ और जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

चार फैसलों में विरोधाभासी मत, इसलिए लार्जर बेंच को भेजा मामला

मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक खोत की सिंगल बेंच के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की संविलियन से पहले की सेवा को पेंशन लाभ में शामिल करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट के चार निर्णयों में अलग-अलग अभिमत सामने आए हैं। इन विरोधाभासी निर्णयों को देखते हुए सिंगल बेंच ने रजिस्ट्री कार्यालय को मामले को एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर लार्जर बेंच का निर्णय प्राप्त किया जा सके।

क्या है दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी का पूरा मामला?

यह मामला नरसिंहपुर के लोक निर्माण विभाग से चौकीदार के पद से सेवानिवृत्त हुए कल्याण सिंह गौंड़ की याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की नियुक्ति 1 जुलाई 1985 को चौकीदार के पद पर दैनिक वेतन भोगी के रूप में हुई थी। इसके बाद 13 फरवरी 1997 को शासकीय आदेश के तहत उनका नियमित पद पर संविलियन कर दिया गया। वे शासकीय सेवा में रहे और 31 जनवरी 2018 को सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी दैनिक वेतन भोगी के रूप में संविलियन से पहले की सेवा अवधि को पेंशन लाभ के लिए शामिल नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने अपने पूर्व सेवाकाल को पेंशन की अर्हक सेवा में जोड़ने की मांग को लेकर वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

संविलियन से पहले की सेवा पेंशन में जुड़ेगी या नहीं?

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि किसी कर्मचारी ने कई वर्षों तक दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्य किया और बाद में उसका नियमितीकरण या संविलियन कर दिया गया, तो क्या उसकी पूर्व सेवा अवधि को पेंशन की Qualifying Service में जोड़ा जा सकता है? 

यदि लार्जर बेंच पूर्व दैनिक वेतन भोगी सेवा को पेंशन के लिए अर्हक (qualifying) मानती है, तो इसका लाभ समान परिस्थितियों वाले बड़ी संख्या में कर्मचारियों को मिल सकता है।

याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से रखी गई दलीलें

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। सुनवाई के दौरान पेंशन के लिए अर्हक सेवा, दैनिक वेतन भोगी सेवा तथा नियमितीकरण/संविलियन से पहले की सेवा अवधि को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया।

लार्जर बेंच के सामने तय होंगे ये दो प्रमुख सवाल

1. दैनिक वेतन भोगी की Qualifying Service क्या होगी?

कामचलाऊ या आकस्मिक स्थापना और नियमित स्थापना में संविलियन किए गए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की पेंशन के लिए अर्हक सेवा (Qualifying Service) किस अवधि से मानी जाएगी?

2. संविलियन से पहले की सेवा पेंशन में जोड़ी जाएगी या नहीं?

क्या नियमितीकरण अथवा संविलियन से पहले दैनिक वेतन भोगी द्वारा दी गई सेवा की पूरी अवधि को पेंशन लाभ के लिए अर्हक सेवा (Qualifying Service) में शामिल किया जा सकता है?

हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों पर पड़ेगा असर

लार्जर बेंच का फैसला इस मामले के साथ-साथ समान परिस्थितियों वाले प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से उन कर्मचारियों को इस फैसले का इंतजार है, जिन्होंने नियमितीकरण या संविलियन से पहले लंबे समय तक दैनिक वेतन भोगी के रूप में सरकारी विभागों में सेवाएं दी थीं।

अब लार्जर बेंच के फैसले का इंतजार

सिंगल बेंच द्वारा मामला लार्जर बेंच को भेजे जाने के बाद अब इस बात पर बड़ी बेंच का निर्णय महत्वपूर्ण होगा कि संविलियन से पहले की दैनिक वेतन भोगी सेवा पेंशन के लिए अर्हक सेवा मानी जाएगी या नहीं। लार्जर बेंच के निर्णय से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पेंशन, Qualifying Service और पूर्व सेवा अवधि से जुड़े कानूनी विवाद पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें   
     WP-1710-2019

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