LAW'S VERDICT

सिर्फ नोटों की बरामदगी से रिश्वत मांगना साबित नहीं होता

लोकायुक्त की विशेष अदालत ने आरोपी बाबू को किया बरी

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

जबलपुर स्थित लोकायुक्त की विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के आरोप में करीब नौ साल पहले गिरफ्तार किए गए कमर्शियल टैक्स विभाग के बाबू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ आरोपी की जेब से रिश्वत की रकम बरामद हो जाने मात्र से रिश्वत मांगने का आरोप साबित नहीं होता। अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी ने अपनी इच्छा से शिकायतकर्ता से दो हजार रुपए रिश्वत के रूप में मांगे थे।

2018 में लोकायुक्त ने किया था ट्रैप

प्रकरण के अनुसार, कमर्शियल टैक्स विभाग में पदस्थ प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को लोकायुक्त की टीम ने 2 जनवरी 2018 को सुरेश कुमार गुप्ता से दो हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता नम्रता अग्रवाल ने बचाव पक्ष की ओर से दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को जानबूझकर रिश्वत के मामले में फंसाया गया था।

जेब में शिकायतकर्ता ने रखे थे रुपए- बचाव पक्ष

बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि प्रदीप कुमार श्रीवास्तव जब कैंटीन की ओर जा रहे थे, उसी दौरान शिकायतकर्ता सुरेश कुमार गुप्ता ने उनकी जेब में दो हजार रुपए रख दिए। आरोपी जब तक कुछ समझ पाता, उससे पहले ही लोकायुक्त की टीम ने उसे पकड़ लिया। अधिवक्ता नम्रता अग्रवाल ने कहा कि यह दावा अपर आयुक्त के निज सहायक विजय शंकर मिश्रा की गवाही से भी हुई। उन्होंने आरोपी की जेब में रुपए रखते हुए शिकायतकर्ता को देखने की बात कही थी।

वाइस रिकॉर्डिंग से भी नहीं हुई आवाज की पुष्टि

बचाव पक्ष ने लोकायुक्त द्वारा पेश की गई वाइस रिकॉर्डिंग पर भी सवाल उठाए। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ कि उसमें मौजूद आवाज आरोपी प्रदीप श्रीवास्तव की ही थी। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि कथित रिश्वत की घटना से चार दिन पहले प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने शिकायतकर्ता सुरेश कुमार गुप्ता के खिलाफ उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी। इसी विवाद के चलते शिकायतकर्ता ने कथित रूप से आरोपी की जेब में रुपए रखकर उसे रिश्वत के मामले में फंसाने की साजिश रची।

ट्रैप टीम के आरक्षक के संपर्क पर भी उठे सवाल

बचाव पक्ष ने ट्रैप टीम में शामिल आरक्षक पंकज तिवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। दलील दी गई कि घटना से तीन दिन पहले से आरक्षक शिकायतकर्ता के लगातार संपर्क में था। बचाव पक्ष के अनुसार, आरक्षक और शिकायतकर्ता के बीच लगातार संपर्क का कारण क्या था, इसका संतोषजनक स्पष्टीकरण अभियोजन की ओर से सामने नहीं आया। इससे पूरे प्रकरण की परिस्थितियां संदेहास्पद प्रतीत होती हैं।

अदालत ने आरोपी को किया बरी

मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने माना कि अभियोजन आरोपी द्वारा स्वेच्छा से दो हजार रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल रिश्वत की रकम की बरामदगी अपने आप में रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने आरोपी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को बरी कर दिया।



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