LAW'S VERDICT

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: Comprehensive Insurance Policy होने से यात्री की पूरी जिम्मेदारी बीमा कंपनी की नहीं

खनिज निगम के अध्यक्ष रहे गोविन्द मालू की कार के एक्सीडेंट से जुड़े मामले पर आया फैसला 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, इंदौर 
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सड़क हादसे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में साफ किया है कि केवल वाहन की बीमा पॉलिसी को Comprehensive या Package Policy कहने से यात्री की मौत पर बीमा कंपनी की पूरी जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती। बीमा कंपनी कितनी राशि देगी, यह पॉलिसी की शर्तों और जमा किए गए प्रीमियम पर निर्भर करेगा। इन टिप्पणियों के साथ जस्टिस विनय सराफ की सिंगल बेंच ने  इस मामले में बीमा कंपनी की जिम्मेदारी ₹1 लाख तक सीमित रखी, लेकिन मृतक के परिवार को मिलने वाला कुल मुआवजा बढ़ाकर ₹37,62,833 कर दिया।

क्या था मामला?

यह मामला 20 फरवरी 2012 का है। मप्र राज्य खनिज निगम के तत्कालीन अध्यक्ष गोविंद मालू के साथ रविंद्र शाह निगम की कार में इंदौर से भोपाल जा रहे थे। सीहोर के पास जाटकखेड़ा जोड़ के पास तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण कार अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में रविंद्र शाह को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कार में सवार अन्य लोगों को भी चोटें आई थीं। मामले में पुलिस ने ड्राइवर ऋषि के खिलाफ केस दर्ज किया था और जांच के बाद उसके खिलाफ चालान पेश किया।

परिवार ने मांगा था ₹1.25 करोड़ मुआवजा

मृतक रविंद्र शाह की पत्नी, बच्चों और मां ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 के तहत कोर्ट में दावा पेश किया। परिवार ने ₹1.25 करोड़ मुआवजे की मांग की थी। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, इंदौर ने 19 सितंबर 2014 को मामले का फैसला करते हुए परिवार को ₹28,86,616 मुआवजा देने का आदेश दिया। हालांकि ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी की जिम्मेदारी केवल ₹1 लाख तक मानी। बाकी राशि वाहन मालिक (राज्य खनिज निगम) और चालक से वसूलने का आदेश दिया गया। इसके बाद वाहन मालिक राज्य खनिज निगम और मृतक के परिवार, दोनों ने हाईकोर्ट में अपील की।

वाहन मालिक ने कहा- बीमा कंपनी पूरी राशि दे

राज्य खनिज निगम की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि कार का Comprehensive Package Policy के तहत बीमा कराया गया था। इसलिए बीमा कंपनी को पूरी compensation राशि देनी चाहिए। परिवार ने भी इस दलील का समर्थन किया। दूसरी ओर बीमा कंपनी ने कहा कि यात्री के जोखिम के लिए पॉलिसी में केवल ₹1 लाख तक का कवर था। इसके लिए चार यात्रियों के लिए ₹200 का प्रीमियम लिया गया था। बीमा कंपनी का कहना था कि यदि मालिक को इससे अधिक या पूरी liability का insurance चाहिए था, तो उसे अतिरिक्त premium देना चाहिए था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पॉलिसी पर Comprehensive या Package Policy लिखा होने से बीमा कंपनी की liability unlimited नहीं हो जाती। कोर्ट ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि पॉलिसी में क्या शर्तें हैं और किस जोखिम के लिए कितना premium लिया गया है। इस मामले में मालिक ने यात्री के लिए unlimited risk cover कराने के लिए अतिरिक्त premium नहीं दिया था। इसलिए बीमा कंपनी को ₹28 लाख से अधिक की पूरी मुआवजा राशि देने के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के C.M. Jaya और Balakrishnan मामलों में दिए गए फैसलों का भी हवाला दिया।

परिवार को अब मिलेगा ज्यादा मुआवजा

बीमा कंपनी की liability ₹1 लाख तक सीमित रखने के बावजूद हाईकोर्ट ने मृतक के परिवार की compensation बढ़ाने की मांग स्वीकार कर ली। Tribunal ने मृतक की आय ₹3,76,584 सालाना मानी थी। मृतक Outlook Publication Pvt. Ltd. में Assistant Editor के पद पर काम करते थे। परिवार ने यह भी बताया था कि मृतक पत्रकार, लेखक, प्रोफेसर, न्यूज एंकर और अन्य कामों से भी कमाई करते थे। लेकिन इन अतिरिक्त आय को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए। इसलिए हाईकोर्ट ने केवल उनकी नौकरी से मिलने वाली प्रमाणित आय को माना। मृतक की उम्र हादसे के समय करीब 51 साल थी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Pranay Sethi फैसले के अनुसार 15 प्रतिशत Future Prospects भी जोड़े। इसके साथ ही Loss of Estate, Funeral Expenses और Consortium की राशि भी जोड़ी गई।

मुआवजा ₹37.62 लाख हुआ

सभी गणनाओं के बाद हाईकोर्ट ने कुल उचित मुआवजा ₹37,62,833 माना। ट्रिब्यूनल ने पहले ₹28,86,616 दिए थे। इस तरह हाईकोर्ट ने मुआवजे में ₹8,76,217 की बढ़ोतरी की। हाईकोर्ट ने कहा कि इस बढ़ी हुई राशि पर भी award में तय शर्तों के अनुसार 6 प्रतिशत ब्याज लागू रहेगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने वाहन मालिक राज्य खनिज निगम की अपील खारिज कर दी। वहीं मृतक के परिवार की अपील आंशिक रूप से मंजूर कर ली।

 

हाईकोर्ट का आदेश देखें       MA-2467-2014

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