प्रसूति सहायता राशि नहीं मिलने की शिकायत पर CM ने की थी कार्रवाई; हाईकोर्ट ने कहा- 10 दिन में विभागीय अपील दाखिल करें
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़ | जबलपुर
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा निलंबित किए गए छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गुन्नाड़े को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने उनकी याचिका का निराकरण करते हुए कहा कि निलंबन आदेश के खिलाफ वे पहले विभाग के समक्ष वैधानिक अपील दाखिल करें।
हाईकोर्ट ने डॉ. गुन्नाड़े को 10 दिनों के भीतर सिविल सर्विस रूल्स के नियम 23 के तहत अपील दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है। कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि अपील का 60 दिनों के भीतर विधि अनुसार निराकरण किया जाए।
CM ने सार्वजनिक घोषणा कर किया था निलंबित
डॉ. नरेश गुन्नाड़े की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान 8 अगस्त 2026 को सार्वजनिक रूप से उनके निलंबन की घोषणा की गई थी। डॉ. गुन्नाड़े पर आरोप था कि सीमा तुमराम को प्रसूति सहायता राशि उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की गई थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके निलंबन की घोषणा की थी। निलंबन के बाद डॉ. गुन्नाड़े को छिंदवाड़ा से करीब 307 किलोमीटर दूर कटनी स्थित कार्यालय में अटैच किया गया था।
‘सेकेंड सैटरडे को जल्दबाजी में किया निलंबन’
निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए डॉ. गुन्नाड़े ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि 8 अगस्त 2026 को सेकेंड सैटरडे था और सरकारी अवकाश था। याचिकाकर्ता का दावा था कि अवकाश के दिन जल्दबाजी में और कथित राजनीतिक दबाव में निलंबन की कार्रवाई की गई, इसलिए इसे अवैधानिक माना जाना चाहिए। उन्होंने हाईकोर्ट से निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए राहत की मांग की थी।
सरकार ने बताया विभागीय अपील का विकल्प
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराई। सरकार की ओर से कहा गया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम के नियम 23 के तहत निलंबन आदेश के खिलाफ विभागीय अपील का वैधानिक प्रावधान मौजूद है। ऐसे में याचिकाकर्ता को पहले उपलब्ध वैकल्पिक वैधानिक उपाय का इस्तेमाल करना चाहिए और सीधे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने दी अपील की स्वतंत्रता
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। कोर्ट ने डॉ. नरेश गुन्नाड़े को निलंबन आदेश के खिलाफ विभागीय अपील दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है। उन्हें 10 दिनों के भीतर अपील दाखिल करनी होगी और संबंधित विभाग को उस अपील का 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार फैसला करना होगा। इस तरह हाईकोर्ट ने फिलहाल निलंबन आदेश पर सीधे हस्तक्षेप नहीं किया है और याचिकाकर्ता को पहले विभागीय अपील के वैधानिक रास्ते का इस्तेमाल करने को कहा है।
