LAW'S VERDICT

कटनी हत्या मामले में FSL रिपोर्ट पर हाईकोर्ट नाराज: खोपड़ी सागर भेजी गई तो रिपोर्ट जबलपुर से कैसे आई?

 FSL की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, ACS और डायरेक्टर से मांगा जवाब

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 
कटनी में हुई हत्या के एक मामले में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि मृतक की मानव खोपड़ी का सैंपल जांच के लिए सागर स्थित FSL भेजा गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट जबलपुर स्थित लैब से जारी हुई। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) और FSL के डायरेक्टर से जवाब तलब किया है।

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने कहा- फॉरेंसिक जांच में इस तरह की गंभीर विसंगति के आधार पर इंसानी जिंदगियों का फैसला नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वालीं डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव को भी अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

हत्या के बाद चूना भट्टा में फेंकी थी लाश 

मामला कटनी जिले के कुठला थाना क्षेत्र के कछगवां में स्थित सिमको कंपनी के चूना भट्टे के मैनेजर समनू प्रसाद विश्वकर्मा की हत्या से जुड़ा है। आरोप है कि 20 जून 2024 को समनू प्रसाद की हत्या कर उसके शव को चूना भट्टे में फेंक दिया गया था। इस मामले की सुनवाई के बाद कटनी की जिला एवं सत्र न्यायालय ने 16 दिसंबर 2025 को एक महिला सहित पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जिला अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए पांचों आरोपियों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अपील दायर की है। इसी अपील की सुनवाई के दौरान FSL रिपोर्ट को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।

खोपड़ी सागर भेजी गई, रिपोर्ट जबलपुर से कैसे आई?

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अधिवक्ता विजित साहू ने अदालत के समक्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट से संबंधित तथ्यों पर दलीलें रखीं। मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि कटनी के पुलिस अधीक्षक द्वारा मृतक की मानव खोपड़ी का सैंपल जांच के लिए सागर की फॉरेंसिक लैब भेजा गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट जबलपुर स्थित लैब से जारी की गई।

कोर्ट ने इस विसंगति को गंभीर मानते हुए FSL की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। बेंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि टेस्टिंग का काम या तो आउटसोर्स कर अयोग्य लोगों को दिया गया या फिर रिपोर्टों पर आँखें बंद करके हस्ताक्षर किए जा रहे हैं।

‘ऐसी गलत रिपोर्ट के आधार पर इंसानी जिंदगियों का फैसला नहीं हो सकता’

हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच के लिए भेजे गए सैंपल और रिपोर्ट जारी करने वाली प्रयोगशाला के बीच ही ऐसी विसंगति हो, तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आपराधिक मामलों में बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य होती है और ऐसी रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की लापरवाही का सीधा असर आरोपी के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

ACS और FSL डायरेक्टर से दो सप्ताह में मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के डायरेक्टर को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शपथपत्र दाखिल करने से पहले वे संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन कर सकते हैं और यह स्पष्ट करें कि सागर भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट जबलपुर की लैब से किस परिस्थिति में जारी हुई।

रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाली डॉक्टर को भी बुलाया

हाईकोर्ट ने FSL रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वालीं डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव को भी अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उन्हें मामले से संबंधित अपना शपथपत्र भी प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी। उस दिन हाईकोर्ट के समक्ष गृह विभाग के ACS, FSL डायरेक्टर और संबंधित डॉक्टर की ओर से जवाब पेश किया जाना है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      CRA-823-2026

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