सिंगल बेंच का फैसला पलटकर डिवीज़न बेंच ने कहा- भर्ती प्रक्रिया के बीच में नहीं बदले जा सकते नियम
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2018 के तहत स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग की संयुक्त शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके नियमों में बीच में बदलाव नहीं किया जा सकता।
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को पलटते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जनजातीय कार्य विभाग में पहले से पदस्थ हो चुके मेरिटोरियस अभ्यर्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग में चॉइस फिलिंग का अवसर दिया जाए। इसके बाद उनकी मेरिट के आधार पर पदस्थापन सुनिश्चित किया जाए। हाईकोर्ट के इस निर्णय से प्रदेश के सैकड़ों शिक्षकों की पोस्टिंग प्रभावित होने की संभावना है।
54 अपीलों पर आया हाईकोर्ट का फैसला
यह फैसला सिवनी जिले की मिडिल स्कूल टीचर साक्षी ताम्रकार सहित अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल 54 अपीलों पर सुनाया गया। वर्ष 2018 में स्कूल शिक्षा और ट्राइबल वेलफेयर विभाग के लिए संयुक्त शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से भी अधिक अंक प्राप्त किए थे। मेरिट के आधार पर इन अभ्यर्थियों को जनजातीय कार्य विभाग के स्कूल आवंटित कर दिए गए। बाद में नवंबर और दिसंबर 2022 में जारी निर्देशों के कारण एक विभाग में नियुक्ति लेकर जॉइन कर चुके अभ्यर्थियों को दूसरे विभाग यानी स्कूल शिक्षा विभाग की शेष रिक्तियों के लिए होने वाली काउंसलिंग और चॉइस फिलिंग से बाहर कर दिया गया।
कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को मिला पसंदीदा स्कूल
अभ्यर्थियों का तर्क था कि बाद में जारी इन निर्देशों के कारण भर्ती प्रक्रिया की मूल व्यवस्था प्रभावित हुई। उच्च मेरिट प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग में अपनी पसंद के स्कूल चुनने का अवसर नहीं मिला, जबकि उनसे कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग में पसंदीदा स्कूल आवंटित हो गए। इसी व्यवस्था को चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
दस्तावेज सत्यापन के बाद भी चॉइस फिलिंग से रोका
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत कुमार बड़ारया, अंशुमान सिंह और अमित कुमार चतुर्वेदी ने अभ्यर्थियों की ओर से पक्ष रखा। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में साक्षी ताम्रकार के मामले का विशेष उल्लेख किया। कोर्ट के सामने बताया गया कि साक्षी ताम्रकार का दस्तावेज सत्यापन हो चुका था और चॉइस लिस्ट में उनका नाम भी शामिल था। इसके बावजूद केवल इसलिए उन्हें चॉइस फिलिंग से वंचित कर दिया गया क्योंकि ट्राइबल विभाग की ओर से उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया जा चुका था।
दो महीने में चॉइस फिलिंग का अवसर
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह दो माह के भीतर संबंधित आवेदकों को स्कूल चॉइस फिलिंग पॉलिसी के तहत अपनी प्राथमिकताएं दर्ज करने का अवसर प्रदान करे। इसके बाद अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर पोस्टिंग तय की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि इस प्रक्रिया के कारण पहले से कार्यरत कम मेरिट वाले शिक्षक प्रभावित होते हैं, तो उन्हें उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर संबंधित विभाग या दूसरे विभाग में समायोजित किया जाए।
भर्ती नियमों में बदलाव पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियम बदलने के सिद्धांत पर स्पष्ट टिप्पणी की है। अदालत ने माना कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीदवारों के अधिकारों और चयन की मूल शर्तों को प्रभावित करने वाले बदलाव नहीं किए जा सकते। फैसले से शिक्षक भर्ती 2018 से जुड़े मेरिटोरियस अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थापना को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
