LAW'S VERDICT

OBC Reservation: 'एक तरफ 8 लाख कमाने वाला OBC अमीर, दूसरी तरफ जनरल गरीब... ऐसा भेदभाव क्यों?'

मप्र हाईकोर्ट में राज्य सरकार की नीति पर उठे सवाल, बुधवार को भी जारी रहेगी सुनवाई 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर | 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई सोमवार को लगातार 13वें दिन भी जारी रही। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच के सामने हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार की आरक्षण नीति पर कई महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक प्रश्न उठाते हुए कहा कि सरकार के मानदंडों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है।

उन्होंने अदालत में दलील दी कि ₹8 लाख वार्षिक आय वाला ओबीसी व्यक्ति 'क्रीमी लेयर' मानकर आरक्षण से बाहर कर दिया जाता है, जबकि समान आय वाला सामान्य वर्ग का व्यक्ति EWS के तहत आर्थिक रूप से कमजोर मानकर आरक्षण का पात्र बन जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही आय सीमा पर दो अलग-अलग मानदंड कैसे लागू किए जा सकते हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रत्नू और वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने ओबीसी आरक्षण के समर्थन में अपनी दलीलें पूरी कीं। इसके बाद विशेष खंडपीठ के निर्देश पर वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बहस शुरू की। उन्होंने कहा कि वे न्यायालय के समक्ष केवल वे कानूनी और व्यावहारिक पहलू रखेंगे, जिन पर अब तक विस्तृत चर्चा नहीं हुई है।

जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सरकार को घेरा

वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने राज्य सरकार के प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की सामाजिक संरचना इस प्रकार है—

  • अनुसूचित जनजाति (ST): 21.14%
  • अनुसूचित जाति (SC): 15.60%
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 51%
  • कुल आरक्षित वर्ग: 87.7%
  • सामान्य (अनारक्षित) वर्ग: 12.3%

उन्होंने तर्क दिया कि सामान्य वर्ग की कुल आबादी 12.3 प्रतिशत है और उसमें भी EWS के पात्र लोगों की संख्या बहुत कम है। इसके बावजूद सरकार ने बिना समुचित आंकड़ों और अध्ययन के 10 प्रतिशत EWS आरक्षण लागू कर दिया।

EWS आरक्षण के क्रियान्वयन पर भी उठे सवाल

बहस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) का उल्लेख करते हुए कहा कि EWS आरक्षण का लाभ अनारक्षित (Open Category) सीटों के भीतर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने दलील दी कि राज्य सरकार कुल रिक्त पदों में से 10 प्रतिशत सीटें EWS के लिए आरक्षित कर रही है, जिससे SC, ST और OBC सहित अन्य वर्गों के अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

ऐतिहासिक और सामाजिक आधार का भी दिया हवाला

अपने तर्कों के समर्थन में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने मनुस्मृति, भृगु संहिता, रामायण, महाभारत और पतंजलि सहित विभिन्न ऐतिहासिक एवं धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की अधिसूचित ओबीसी जातियां—जैसे कृषक, शिल्पकार, नाई, धोबी, तेली आदि—ऐतिहासिक रूप से सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महाजन आयोग ने विस्तृत अध्ययन के बाद ही इन समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल करने की अनुशंसा की थी।

4 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

समयाभाव के कारण विशेष खंडपीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए अगली तारीख 4 अगस्त 2026 को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की है। अगली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर अपनी बहस आगे जारी रखेंगे।

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