CMHO की मेडिकल रिपोर्ट में यात्रा के लिए फिट पाया गया पति, कोर्ट ने कहा- सफर कर सकते हो तो पेशी पर जाओ बैतूल
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, इंदौर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर बीमारी का हवाला देकर पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले को इंदौर फैमिली कोर्ट से बैतूल स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग खारिज कर दी। जस्टिस जेके पिल्लई अदालत ने कहा कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की मेडिकल रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को ट्रेन, बस या कार से यात्रा करने के लिए सक्षम बताया गया है। ऐसे में केवल बीमारी के आधार पर मामले के स्थानांतरण का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
पति ने बीमारी का हवाला देकर मांगा था केस ट्रांसफर
याचिकाकर्ता पति नीलेश डढोरे ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 24 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इंदौर फैमिली कोर्ट में लंबित दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना (Restitution of Conjugal Rights) की याचिका को बैतूल ट्रांसफर करने की मांग की थी।
दंपती का विवाह 23 अप्रैल 2024 को बैतूल में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। वैवाहिक विवाद के बाद दोनों अलग रहने लगे। पति ने पहले ही बैतूल फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर रखी है, जबकि पत्नी रितिका ने बाद में इंदौर फैमिली कोर्ट में दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना की याचिका दायर की।
बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस और पैरालिसिस का दिया था हवाला
पति नीलेश की ओर से कहा गया कि वह बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस, स्पाइनल संक्रमण, मस्तिष्क में संक्रमण और आंशिक लकवे से पीड़ित है। उसकी शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह बैतूल से इंदौर तक लगभग 13 से 14 घंटे की यात्रा कर सके। लगातार इलाज और फिजियोथेरेपी के कारण उसका बैतूल में रहना आवश्यक है।
पत्नी ने कहा- पति पूरी तरह सक्षम, सहानुभूति लेने की कोशिश
पत्नी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पति अपनी बीमारी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। वह एक सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर है और सालाना लगभग 26 लाख रुपये कमाता है। वह नियमित रूप से काम के सिलसिले में पुणे तक यात्रा करता है। मेडिकल दस्तावेज और फोटो भी बताते हैं कि वह सामान्य रूप से चल-फिर सकता है।
हाईकोर्ट ने CMHO से मंगाई मेडिकल रिपोर्ट
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बैतूल के CMHO से याचिकाकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति पर सीलबंद लिफाफे में मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि याचिकाकर्ता ट्रेन, बस या कार से यात्रा करने के लिए चिकित्सकीय रूप से सक्षम है। सुरक्षा की दृष्टि से उसके साथ एक सहायक (Attendant) रहने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उसे केवल बाएं पैर की न्यूरोलॉजिकल कमजोरी के कारण वॉकिंग स्टिक की आवश्यकता है।
हाईकोर्ट बोला- यात्रा करने में असमर्थ होने का दावा साबित नहीं
मेडिकल रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि वह इंदौर आने-जाने में पूरी तरह असमर्थ है। इसलिए पारिवारिक विवाद के मामले को इंदौर से बैतूल स्थानांतरित करने का कोई उचित आधार नहीं बनता।
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मेडिकल रिपोर्ट के सामने याचिकाकर्ता का दावा टिक नहीं पाता और ट्रांसफर की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
