कोर्ट ने कहा- चार्ज तय करने के चरण में साक्ष्यों की गहराई से जांच नहीं की जा सकती, ट्रायल में परखी जाएगी CDR और अन्य सामग्री
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, इंदौर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 1200 किलोग्राम डोडाचूरा (पॉपी स्ट्रॉ) तस्करी मामले में आरोपी द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस जेके पिल्लई की अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर यह नहीं देखा जाता कि अभियोजन अंततः दोष सिद्ध कर पाएगा या नहीं, बल्कि केवल यह देखा जाता है कि रिकॉर्ड पर मुकदमा चलाने योग्य प्रथमदृष्टया सामग्री उपलब्ध है या नहीं। ऐसे में विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस), जावरा द्वारा आरोप तय करने के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
21 अप्रैल 2025 को पकड़ा गया था 1200 किलो डोडाचूरा
मामले के अनुसार 21 अप्रैल 2025 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर जावरा के सर्किट हाउस रोड स्थित फोरलेन के पास एक कंटेनर की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान 60 बोरियों में भरा 1200 किलोग्राम डोडाचूरा बरामद हुआ। इसके बाद चालक सतविंदर सिंह और क्लीनर सुखदेव सिंह को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
दूसरे मेमोरेंडम और CDR के आधार पर बना आरोपी
जांच के दौरान सह-आरोपियों ने पहले बयान में केवल यूसुफ का नाम लिया था। बाद में दिए गए दूसरे मेमोरेंडम में पहली बार याचिकाकर्ता फ़ैयाज़ खान का नाम सामने आया। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि वह डोडाचूरा कंटेनर में लोड कराने के दौरान मौके पर मौजूद था। इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर भी उसे एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 के तहत साजिश में शामिल किया गया।
आरोपी का तर्क- मेरे पास से कोई बरामदगी नहीं
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वह एक ढाबा संचालक है और उसके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। उसके खिलाफ पूरा मामला केवल सह-आरोपी के दूसरे मेमोरेंडम बयान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड पर आधारित है। केवल फोन पर बातचीत होना किसी आपराधिक साजिश का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट बोला- ट्रायल में होगी साक्ष्यों की जांच
हाईकोर्ट ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सह-आरोपियों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का वास्तविक मूल्यांकन ट्रायल के दौरान किया जाएगा। आरोप तय करने के चरण में अदालत साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण या उनकी विश्वसनीयता का अंतिम निर्णय नहीं कर सकती।
विशेष न्यायाधीश के आदेश में नहीं मिली कोई त्रुटि
अदालत ने कहा कि विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस, जावरा द्वारा पारित आदेश में कोई अधिकार क्षेत्र संबंधी त्रुटि, अवैधता, विकृति (Perversity) या गंभीर अनियमितता नहीं है। इसलिए पुनरीक्षण अधिकार का प्रयोग करते हुए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता।
ट्रायल जारी रखने के निर्देश
हाईकोर्ट ने आरोपी की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए विशेष न्यायाधीश के 12 नवंबर 2025 के आदेश को बरकरार रखा और ट्रायल कोर्ट को कानून के अनुसार मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
