LAW'S VERDICT

मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत को MP हाईकोर्ट से राहत, संपत्ति छिपाने के आरोप वाली दूसरी याचिका भी हुई याचिका

हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव याचिका के बिना नहीं हो सकता हस्तक्षेप, PIL के जरिए जांच के आदेश संभव नहीं

Laws Verdict News | जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की प्रधान पीठ ने मंत्री एवं सुरखी विधानसभा से विधायक गोविन्द सिंह राजपूत को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ नामांकन पत्र में संपत्ति की जानकारी छिपाने के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जनहित याचिका के माध्यम से जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते

एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत चुनाव से जुड़े विवादों को चुनौती देने का वैधानिक उपाय चुनाव याचिका (Election Petition) है। यदि निर्धारित समय सीमा में चुनाव याचिका दायर नहीं की जाती, तो बाद में जनहित याचिका के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी जा सकती। इससे पहले हाईकोर्ट सागर जिले के राहतगढ़ निवासी नीरज शर्मा द्वारा इसी मुद्दे पर दायर याचिका को भी खारिज कर चुका है।

क्या थे आरोप?

सागर जिले के रहली निवासी राजकुमार सिंह ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सुरखी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते समय गोविन्द सिंह राजपूत ने अपने नामांकन पत्र में करोड़ों रुपये की संपत्ति का विवरण छिपाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस संबंध में 21 मार्च 2025 को चुनाव आयोग में शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई तर्कसंगत आदेश पारित नहीं किया गया। राज्य सरकार को भी शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवादों के समाधान के लिए कानून में विशेष व्यवस्था मौजूद है। ऐसे मामलों में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 81 के तहत समय सीमा के भीतर चुनाव याचिका दायर करना ही वैधानिक उपाय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका के माध्यम से चुनाव परिणाम या नामांकन से जुड़े विवादों की जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते।

फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया आदेश

मामले में मंगलवार को विस्तृत सुनवाई के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने जनहित याचिका खारिज कर दी। मामले में राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी, चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा, हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल एवं अधिवक्ता अर्पित अग्रवाल और गोविन्द सिंह राजपूत की ओर से अधिवक्ता विवेक रंजन पाण्डेय ने पैरवी की


हाईकोर्ट का आदेश देखें      WP-36367-2025

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