कान्हा टाइगर रिजर्व में 10 बाघों की मौत पर सख्त हाईकोर्ट
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कान्हा टाइगर रिजर्व में कथित रूप से कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से 10 बाघों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को सभी टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर सहित खाली पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के बजट में कटौती पर भी चिंता जताई और केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने को कहा।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की है।
10 बाघों की मौत के बाद दायर हुई जनहित याचिका
यह जनहित याचिका मुंबई के चेंबूर निवासी अधिवक्ता एवं वन्यजीव प्रेमी सुबित चक्रवर्ती ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि 2 अप्रैल 2026 से अब तक कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के संक्रमण से 10 बाघों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार ने प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाए।
याचिका में मांग की गई है कि NTCA की गाइडलाइन के अनुसार इन मौतों की जांच के लिए उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में 29 मई 2026 को नोटिस जारी किए थे।
कोर्ट में क्या बोली सरकार?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने अदालत को बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों का वैक्सीनेशन अभियान पूरा हो चुका है। अब करीब 2,000 कुत्तों को बूस्टर डोज लगाने की तैयारी की जा रही है।
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और प्रतीक रूसिया ने दलील दी कि संक्रमण रोकने के लिए ऐसी व्यवस्था केवल कान्हा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में लागू की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने कहा कि—
- सभी टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर सहित रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।
- NTCA के बजट में कमी वन्यजीव संरक्षण के लिए चिंता का विषय है।
- केंद्र और राज्य सरकार अगली सुनवाई से पहले उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
यह मामला अब 17 अगस्त को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
