LAW'S VERDICT

खाद वितरण की नई ऑनलाइन व्यवस्था पर लगी मुहर, ई-विकास सिस्टम के खिलाफ याचिका खारिज

हाईकोर्ट बोला- किसानों के हित में बनी है ई-विकास योजना, इंटरनेट की दिक्कत हो तो कलेक्टर कर सकते हैं ऑफलाइन व्यवस्था लागू

जबलपुर। मध्यप्रदेश में किसानों को खाद वितरण में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए लागू की गई ई-विकास  ऑनलाइन प्रणाली को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने नई व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह योजना किसानों के हित में बनाई गई है और इसमें न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि खाद वितरण में किसी जिले में व्यावहारिक समस्या आती है तो संबंधित जिला कलेक्टर के समक्ष शिकायत की जा सकती है।

खाद की ऑनलाइन व्यवस्था पर रोक लगाने की थी मांग

यह याचिका कृषि आदान विक्रेता संघ, जबलपुर के सदस्य जयेश ओझा की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने के कारण किसान ई-टोकन नहीं ले पा रहे हैं। वहीं, बटाई या पट्टे पर खेती करने वाले किसानों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने से उन्हें खाद मिलने में परेशानी हो रही है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि किसान मुख्य रूप से यूरिया और डीएपी की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य उर्वरकों का स्टॉक दुकानों में जमा हो रहा है। इसलिए नई ऑनलाइन व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

सरकार ने बताया- नई व्यवस्था से रुकेगी कालाबाजारी

मामले पर 10 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने अदालत को बताया कि पुरानी व्यवस्था में खेती नहीं करने वाले लोग भी सब्सिडी वाली खाद खरीदकर उसकी कालाबाजारी करते थे या गैर-कृषि कार्यों में उसका उपयोग करते थे।

सरकार ने बताया कि ई-विकास प्रणाली में अब किसानों को उनकी भूमि के रिकॉर्ड के आधार पर ही खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगेगी। वहीं, बटाई या किराए पर खेती करने वाले किसान एसडीएम से सत्यापन कराकर ई-टोकन के माध्यम से खाद प्राप्त कर सकते हैं। 10 मार्च को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

हाईकोर्ट ने कहा- किसानों की भलाई के लिए बनाई गई योजना

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि ई-विकास योजना किसानों के हित और खाद वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। अदालत ने कहा कि सरकार की नीतिगत योजनाओं में तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, जब तक वे स्पष्ट रूप से मनमानी या कानून के विरुद्ध न हों।

इंटरनेट की समस्या हो तो कलेक्टर लागू कर सकते हैं ऑफलाइन व्यवस्था

हाईकोर्ट ने हाल ही में सुनाये अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि ई-विकास प्रणाली के क्लॉज 18.9 के तहत यदि किसी जिले में इंटरनेट या अन्य तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है तो संबंधित जिला कलेक्टर परिस्थितियों के अनुसार पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने का निर्णय ले सकते हैं।

याचिका खारिज करते हुए अदालत ने खाद विक्रेताओं से कहा कि यदि वितरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई हो तो वे सीधे जिला कलेक्टर के समक्ष आवेदन देकर उचित राहत प्राप्त कर सकते हैं।

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