LAW'S VERDICT

MP हाईकोर्ट में उठा सवाल- ‘न्यूक्लियर प्लांट और समुद्र के नीचे मेट्रो बन सकती है तो टिकाऊ सड़कें क्यों नहीं?’

सड़कों के ‘मौत के गड्ढों’ पर जनहित याचिका; दावा- 2023 में 5,840 हादसे और 2,161 मौतें, हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य से मांगा जवाब

जबलपुर | लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज

मध्य प्रदेश की सड़कों पर गड्ढों और उनसे होने वाले हादसों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जब देश में न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाए जा सकते हैं और मुंबई में समुद्र के नीचे मेट्रो रूट तैयार किया जा सकता है, तो फिर ऐसी टिकाऊ सड़कें क्यों नहीं बनाई जा सकतीं जो लंबे समय तक खराब न हों।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को होगी।

गड्ढों से हादसों में 31.4% बढ़ोतरी का दावा

यह जनहित याचिका इंदौर के कल्याण संपत गार्डन निवासी सेवानिवृत्त ट्रेन मैनेजर राजेन्द्र सिंह की ओर से दायर की गई है।

याचिका में प्रदेश की सड़कों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए दावा किया गया है कि प्रशासनिक लापरवाही और रखरखाव की कमी के कारण कई सड़कें वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं।

याचिकाकर्ता ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2023 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 2020 से 2023 के बीच सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया।

याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में गड्ढों से संबंधित दुर्घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में 31.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान 5,840 हादसे और 2,161 मौतें होने का दावा किया गया है।

‘50 साल पुरानी सड़क आज भी सही, फिर MP में क्यों नहीं?’

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पुणे की एक सड़क का उदाहरण भी दिया गया। दावा किया गया कि करीब 50 वर्ष पहले बनी सड़क आज भी अच्छी स्थिति में है।

इसी आधार पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर सवाल उठाते हुए कहा गया कि आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद लंबे समय तक टिकने वाली सड़कें क्यों नहीं बनाई जा रही हैं।

हाईकोर्ट ने पहले भी जारी किया था नोटिस

इस जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।

मंगलवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अभिनव मल्होत्रा ने दलीलें रखीं। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया।

डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए मुद्दों और दावों पर संबंधित पक्षों को 5 अगस्त तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता, गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही के मुद्दे पर अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      WP-43729-2025

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