LAW'S VERDICT

₹18 लाख की कथित धोखाधड़ी में समझौते के बाद भी कटनी के व्यापारी को नहीं मिली राहत

MP हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार, कहा- जांच शुरुआती चरण में, जाली लेटर पैड के आरोपों की जांच जरूरी

जबलपुर | लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटनी में दर्ज कथित ₹18 लाख की धोखाधड़ी के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए केवल समझौते के आधार पर FIR रद्द करने से इनकार कर दिया। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की कोर्ट ने कहा है कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आरोपियों पर जाली लेटर पैड तैयार कर रकम प्राप्त करने के भी आरोप हैं। ऐसी स्थिति में जांच पूरी होने से पहले हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल कर आपराधिक कार्यवाही समाप्त करना उचित नहीं होगा।

कटनी के शनि चौक में रहने वाले व्यापारी तीरथदास मोटवानी ने याचिका दायर कर कटनी जिले के माधवनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध क्रमांक 185/2026 की FIR और उससे जुड़ी आगे की कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।

₹18 लाख लेने का आरोप, ₹9 लाख वापस करने के बाद समझौता

शिकायतकर्ता पक्ष ने हाईकोर्ट को बताया कि मामले में तीरथदास मोटवानी और ओम उर्फ़ उधव मोटवानी, दो आरोपी हैं। आरोप है कि दोनों ने शिकायतकर्ता नटराज फ़ूड प्रोडक्ट्स के सुनील ठारवानी से कुल ₹18 लाख लिए थे। याचिकाकर्ता तीरथदास मोटवानी ने अपने हिस्से के ₹9 लाख वापस कर दिए, जिसके बाद शिकायतकर्ताओं ने उसके साथ समझौता कर लिया। हालांकि शिकायतकर्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि सह-आरोपी ओम उर्फ उधव मोटवानी के साथ कोई समझौता नहीं हुआ है।

राज्य सरकार ने किया FIR रद्द करने का विरोध

राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता संतोष यादव ने याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया गया कि मामले में याचिकाकर्ता और उसके सह-आरोपी पर जाली लेटर पैड तैयार कर पैसे लेने का आरोप भी सामने आया है। इसी आधार पर जांच के दौरान BNS की धारा 326(3), 340(1) और 340(2) भी जोड़ी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस के सामने उपस्थित नहीं हुआ और जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जांच एजेंसी को हस्तलेखन परीक्षण के लिए उसके हस्ताक्षर भी लेने हैं। मामले में अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए जाने बाकी हैं।

‘जांच में सामने आ सकते हैं अन्य अपराध’

हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और कानूनी स्थिति पर विचार करते हुए पाया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता और सह-आरोपी के पुलिस के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग नहीं करने की बात सामने आई है। अदालत ने कहा कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से जाली लेटर पैड तैयार कर रकम लेने के आरोपों की जांच की जा रही है और आगे की जांच में अन्य अपराध भी सामने आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में केवल शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता के बीच हुए समझौते के आधार पर FIR और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का आधार नहीं बनता।

FIR रद्द करने की याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि मामले में FIR रद्द करने के लिए अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करने का कोई उचित आधार नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दी। परिणामस्वरूप कटनी के माधवनगर थाने में दर्ज मामले की जांच जारी रहेगी। 

हाईकोर्ट का यह आदेश एक बार फिर स्पष्ट करता है कि आपराधिक मामले में पक्षकारों के बीच समझौता हो जाना हर परिस्थिति में FIR रद्द करने का स्वतः आधार नहीं बनता, विशेष रूप से तब जब जांच प्रारंभिक अवस्था में हो और गंभीर आरोपों की जांच बाकी हो।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      MCRC-20880-2026

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