जॉइनिंग के बावजूद पोर्टल पर डेटा अपलोड नहीं हुआ, हाईकोर्ट ने कहा- सीट किसी और को आवंटित नहीं होगी
जबलपुर | लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक युवा डॉक्टर के भविष्य की रक्षा करते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीज़न बेंच ने कहा कि सिर्फ तकनीकी त्रुटि (Technical Glitch) के कारण किसी योग्य अभ्यर्थी का करियर दांव पर नहीं लगाया जा सकता। हाईकोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) को निर्देश दिया कि संबंधित अभ्यर्थी के लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए और उसकी DNB (पीडियाट्रिक्स) सीट किसी अन्य उम्मीदवार को आवंटित न की जाए। यह आदेश इंदौर निवासी डॉ. (सुश्री) शिवानी पंडित द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता डॉ. शिवानी पंडित को DNB (Paediatrics) के प्रथम राउंड की काउंसलिंग में जय प्रकाश जिला शासकीय अस्पताल, भोपाल में सीट आवंटित हुई थी। उन्हें 15 जुलाई 2026 तक संस्थान में रिपोर्ट करना था।
रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने 13 जुलाई 2026 को अस्पताल में जॉइनिंग भी दे दी थी। लेकिन अभ्यर्थी और सिविल सर्जन, दोनों की ओर से हुई तकनीकी एवं प्रक्रियागत चूक के कारण आवश्यक जानकारी OPJR पोर्टल पर समय पर अपलोड नहीं हो सकी।
इस कारण सिस्टम में सीट खाली दिखाई देने लगी और अगले काउंसलिंग राउंड में वह किसी अन्य उम्मीदवार को आवंटित होने की संभावना बन गई।
हाईकोर्ट ने करियर बचाने के लिए दिया तत्काल संरक्षण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एलसी पटने व अभय पांडेय ने दलीलें रखीं। वहीं केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु तथा राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने स्वीकार किया कि तकनीकी चूक दोनों पक्षों की ओर से हुई है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में एक उभरते हुए डॉक्टर के करियर की रक्षा की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश
अदालत ने आदेश दिया कि—
- डॉ. शिवानी पंडित को आवंटित DNB (Paediatrics) की सीट किसी अन्य उम्मीदवार को आवंटित नहीं की जाएगी।
- याचिकाकर्ता 28 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे तक पुनः संस्थान में जॉइन करें।
- NBEMS 29 जुलाई 2026 सुबह 10 बजे तक OPJR पोर्टल खोले, ताकि आवश्यक दस्तावेज एवं जानकारी अपलोड की जा सके।
- सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीट पर किसी अन्य उम्मीदवार का प्रवेश नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने सरकारी वकीलों की सराहना की
हाईकोर्ट ने इस मामले के सौहार्दपूर्ण समाधान और एक प्रतिभाशाली डॉक्टर का करियर सुरक्षित रखने में सहयोग के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित के प्रयासों की विशेष सराहना भी की।
अदालत ने कहा कि न्यायालय का उद्देश्य केवल कानूनी विवाद का समाधान करना ही नहीं, बल्कि न्यायसंगत परिस्थितियों में योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा करना भी है। इस आदेश को तकनीकी त्रुटियों के कारण प्रभावित होने वाले शैक्षणिक एवं प्रवेश संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-30226-2026
