LAW'S VERDICT

निजी वकील के रहते लीगल एड से कैसे नियुक्त हो गया दूसरा वकील?

हाईकोर्ट ने उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव से 2 दिन में मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

जबलपुर | लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कानूनी सहायता (Legal Aid) के माध्यम से वकील नियुक्त करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है कि जब किसी अपीलकर्ता की ओर से पहले से निजी अधिवक्ता लगातार पैरवी कर रहे थे, तो फिर हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी ने सरकारी खर्च पर दूसरा वकील किस आधार पर नियुक्त कर दिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी, जबलपुर के सचिव को दो दिनों के भीतर व्यक्तिगत हलफनामे (Personal Affidavit) के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।

पॉक्सो एक्ट की सजा के खिलाफ अपील में उठा मामला

यह मामला रायसेन जिले के देहगांव थाना क्षेत्र के ग्राम बिलगवा निवासी सुजीत धाकड़ द्वारा दायर अपील से जुड़ा है। अपील भोपाल की विशेष अदालत द्वारा 11 मार्च 2023 को पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाई गई सजा को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता विजय कुमार पांडे वर्ष 2023 से लगातार पैरवी कर रहे हैं। उनका वकालतनामा पहले से न्यायालय के रिकॉर्ड में दर्ज है और वे प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित भी रहे हैं। इसके बावजूद वर्ष 2025 में हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी की ओर से अधिवक्ता विवेक गौतम को लीगल एड के तहत नियुक्त कर दिया गया तथा उनके पक्ष में नया वकालतनामा भी जारी कर दिया गया। इस पर अदालत ने गहरी आपत्ति जताई।

हाईकोर्ट ने पूछे तीन अहम सवाल

डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के सचिव से निम्न बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है—

  • जब पहले से निजी अधिवक्ता नियुक्त थे, तो लीगल एड के तहत दूसरा वकील किस आधार पर नियुक्त किया गया?
  • क्या संबंधित अपीलकर्ता वास्तव में निःशुल्क कानूनी सहायता (Legal Aid) पाने की पात्रता रखता था?
  • क्या अपीलकर्ता ने सरकारी खर्च पर कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत किया था?

लीगल एड व्यवस्था पर उठे सवाल

हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद लीगल एड के तहत अधिवक्ताओं की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि नियुक्ति नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो इससे भविष्य में कानूनी सहायता प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के सचिव के जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।

हाईकोर्ट का आदेश देखें    CRA-11713-2023

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