LAW'S VERDICT

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर दो दावेदार, हाईकोर्ट ने दोनों को दी राहत

हाईकोर्ट ने कहा- पुरानी कर्मचारी होगी बहाल, वर्तमान कार्यकर्ता को नहीं हटाया जाएगा, सरकार को तीन महीने में नई व्यवस्था करने के निर्देश

ग्वालियर | लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति और पुनर्बहाली से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में संतुलित फैसला सुनाया है। जस्टिस आनंद सिंह बेहरावत की सिंगल बेंच ने कहा है कि पहले पद से हटाई गई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को सेवा में बहाल किया जाए, लेकिन पिछले कई वर्षों से कार्यरत नई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को भी नौकरी से नहीं हटाया जाएगा।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वर्तमान कार्यकर्ता को किसी अन्य रिक्त पद पर समायोजित किया जाए। यदि रिक्त पद उपलब्ध नहीं हो, तो निकटवर्ती आंगनवाड़ी केंद्र में नया पद सृजित कर उन्हें नियुक्त किया जाए।

क्या था मामला?

विदिशा जिले की नटेरन तहसील के ग्राम बिछिया में रहने वाली याचिकाकर्ता प्रियंका कुशवाहा वर्तमान में ग्राम पंचायत बिछिया के आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं।

इस पद पर पहले सुलेखा तिवारी कार्यरत थीं, लेकिन लगातार अनुपस्थित रहने और कार्य में लापरवाही के आरोपों के बाद वर्ष 2015 में उनकी (सुलेखा की) सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।

इसके बाद वर्ष 2016 में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें याचिकाकर्ता प्रियंका कुशवाहा ने सर्वाधिक अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में पहला स्थान हासिल किया और उन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नियुक्त कर दिया गया।

दूसरी अपील में बहाल हुई पुरानी कार्यकर्ता

पूर्व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुलेखा तिवारी ने अपनी सेवा समाप्ति के खिलाफ अपील दायर की। प्रारंभिक स्तर पर उनकी अपील खारिज हो गई, लेकिन बाद में अतिरिक्त आयुक्त, भोपाल ने 31 मार्च 2018 को उनका पक्ष स्वीकार करते हुए सेवा में पुनर्बहाली का आदेश दे दिया। याचिकाकर्ता प्रियंका कुशवाहा ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उन्हें इस अपील में पक्षकार नहीं बनाया गया और बिना सुनवाई का अवसर दिए उनकी नियुक्ति प्रभावित कर दी गई।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने माना कि सुलेखा तिवारी अपने अधिकारों के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। इसलिए यदि अंततः उन्हें राहत मिली है तो उन्हें सेवा में बहाल किया जाना चाहिए।

हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान याचिकाकर्ता की नियुक्ति विधिवत चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि इस पद को लेकर कोई न्यायिक विवाद लंबित है।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता प्रियंका कुशवाहा कई वर्षों से लगातार सेवा दे रही हैं और अब इतने लंबे समय बाद उन्हें नौकरी से हटाना न्यायसंगत नहीं होगा।

हाईकोर्ट के निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निम्न निर्देश दिए—

  • पूर्व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुलेखा तिवारी को तत्काल सेवा में पुनर्बहाल किया जाए।
  • वर्तमान कार्यकर्ता (याचिकाकर्ता प्रियंका कुशवाहा) को किसी उपलब्ध रिक्त पद पर समायोजित किया जाए।
  • यदि कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है, तो निकटवर्ती आंगनवाड़ी केंद्र में नया पद सृजित कर उन्हें नियुक्त किया जाए।
  • यह पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।
  • पुनर्बहाल की जा रही पूर्व कार्यकर्ता को सेवा संबंधी सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन बीच की अवधि का वेतन "नो वर्क, नो पे" सिद्धांत के अनुसार नहीं मिलेगा।

महत्वपूर्ण संदेश

इस फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी के लंबे समय तक सेवा देने और उसकी नियुक्ति में उसकी कोई गलती न होने की स्थिति में न्यायालय समानता और न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों के हितों का संतुलन बना सकता है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें       WP. No. 13019 of 2018

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