LAW'S VERDICT

छात्र संघ चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से कहा- नया एकेडमिक कैलेंडर पेश करें

30 अगस्त को अगली सुनवाई, सरकार ने कहा- सितंबर-अक्टूबर में हो सकते हैं चुनाव

जबलपुर। मध्य प्रदेश के कॉलेजों में वर्ष 2017 से छात्र संघ चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से स्पष्ट कहा कि यदि नए शैक्षणिक सत्र के एकेडमिक कैलेंडर में छात्र संघ चुनाव कराने का प्रावधान किया जा रहा है तो अगली सुनवाई पर पूरा कैलेंडर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

सरकार की ओर से बताया गया कि वर्ष 2026-27 के लिए नया एकेडमिक कैलेंडर अंतिम चरण में है और उसमें छात्र संघ चुनाव कराने का प्रावधान शामिल किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित करते हुए नया कैलेंडर पेश करने के निर्देश दिए।

2017 से नहीं हुए छात्र संघ चुनाव, याचिका में उठाया सवाल

जबलपुर निवासी अदनान अंसारी की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के कॉलेजों में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बावजूद वर्ष 2017 से छात्र संघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। याचिका में इसे छात्रों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अक्षर दीप तथा राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता डॉ. एसएस चौहान ने पक्ष रखा।

हाईकोर्ट ने पूछा- कोविड खत्म हुए चार साल, फिर चुनाव क्यों नहीं?

सुनवाई के दौरान सरकार ने दलील दी कि पहले कोविड-19 महामारी और बाद में नई शिक्षा नीति लागू होने के कारण व्यावहारिक कठिनाइयों की वजह से छात्र संघ चुनाव नहीं कराए जा सके।

इस पर एक्टिंग चीफ जस्टिस ने पूछा कि कोविड समाप्त हुए भी चार वर्ष हो चुके हैं और पिछले शैक्षणिक सत्र में भी चुनाव नहीं हुए। आखिर इसकी वजह क्या है?

सरकार ने जवाब दिया कि नए एकेडमिक कैलेंडर में चुनाव शामिल करने पर विचार हो रहा है और प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद सितंबर-अक्टूबर में चुनाव कराए जा सकते हैं।

कोर्ट ने कहा- केवल आश्वासन नहीं, कैलेंडर पेश करें

जब सरकार ने कहा कि नया कैलेंडर अंतिम चरण में है और उसमें छात्र संघ चुनाव का प्रावधान रहेगा, तब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई पर नया एकेडमिक कैलेंडर पेश किया जाए ताकि सरकार की मंशा और चुनाव कार्यक्रम स्पष्ट हो सके।

अब इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर 30 अगस्त को फिर सुनवाई होगी, जहां सरकार को अपना नया एकेडमिक कैलेंडर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-34295-2024

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