LAW'S VERDICT

MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 'योग्यता नहीं तो नियुक्ति नहीं'; याचिकाएं खारिज

एंटोमोलॉजी डिग्री को जूलॉजी के समकक्ष मानने से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- भर्ती की योग्यता तय करना सरकार और विशेषज्ञ समिति का अधिकार

इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी (MPPSC) असिस्टेंट प्रोफेसर (जूलॉजी) भर्ती-2022 से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता से समझौता नहीं किया जा सकता। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की अदालत ने कहा है कि डिग्री की समकक्षता (Equivalence) तय करना न्यायालय का नहीं, बल्कि सरकार और विशेषज्ञ समिति का अधिकार है। इसी आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए अयोग्य घोषित किए गए अभ्यर्थियों की सभी 5 याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

क्या था मामला?

हाईकोर्ट में ये याचिकाएं डॉ. राहुल पाटीदार व अन्य ने हाईकोर्ट में दाखिल की थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उच्च शिक्षा विभाग की मांग पर MPPSC ने 30 दिसंबर 2022 को असिस्टेंट प्रोफेसर (जूलॉजी) भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने ओबीसी वर्ग से आवेदन किए और लिखित परीक्षा में सफल होकर 13 प्रतिशत प्रोविजनल चयन सूची में स्थान प्राप्त किया।

दस्तावेजों की जांच के बाद MPPSC ने 8 सितंबर 2025 को यह कहते हुए अभ्यर्थी की उम्मीदवारी निरस्त कर दी कि उसके पास विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं है। अभ्यर्थी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए दावा किया कि एमएससी (एग्रीकल्चर) एंटोमोलॉजी जूलॉजी का संबद्ध (Allied) विषय है, लेकिन 14 अक्टूबर 2025 को आयोग ने दोबारा उसकी उम्मीदवारी खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा की सीमाएं तय हैं। अदालत किसी शैक्षणिक विशेषज्ञ संस्था की तरह डिग्रियों की समकक्षता तय नहीं कर सकती और न ही विशेषज्ञ समिति के निर्णय की जगह अपना निर्णय दे सकती है।

कोर्ट ने माना कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से जूलॉजी या उसके अधिसूचित संबद्ध विषय में स्नातकोत्तर डिग्री तथा लाइफ साइंसेज विषय में NET योग्यता अनिवार्य थी।

एंटोमोलॉजी की डिग्री से नहीं बनती पात्रता

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के पास एमएससी (एग्रीकल्चर) एंटोमोलॉजी, पीएचडी (एग्रीकल्चर) तथा NET (Agriculture Entomology) की योग्यता थी, जबकि विज्ञापन में ऐसी योग्यता स्वीकार्य नहीं थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने सभी अभ्यर्थियों की डिग्रियों का परीक्षण करने के बाद ही उन्हें अयोग्य घोषित किया है और इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

NET/SET से नहीं मिलती स्वतः पात्रता

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि NET या SET केवल पात्रता परीक्षा है, यह किसी विशेष पद के लिए स्वतः योग्यता प्रदान नहीं करती। राज्य सरकार को अपनी भर्ती आवश्यकताओं के अनुसार अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने का पूरा अधिकार है।

विज्ञापन की शर्तें नहीं बदली जा सकतीं

हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद विज्ञापन में निर्धारित योग्यताओं का विस्तार या अलग व्याख्या करना उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने आवश्यक योग्यता न होने के कारण आवेदन ही नहीं किया। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के समानता सिद्धांत का उल्लंघन होगा।

याचिकाएं खारिज

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि MPPSC और उच्च शिक्षा विभाग की कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक है तथा इसमें कोई कानूनी, प्रक्रियात्मक या संवैधानिक त्रुटि नहीं है। इसलिए सभी 5 याचिकाओं को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया। 


हाईकोर्ट का फैसला देखें     W.P. No. 42965/2025

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