मप्र हाईकोर्ट का अहम् फैसला, सेवा समाप्ति आदेश हुआ रद्द
इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बीएसएफ (Border Security Force) में चयनित कॉन्स्टेबल (GD) राहुल जाटव को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीज़न बेंच ने कहा कि मामूली प्रकृति के आपराधिक मामले में बरी हो चुके अभ्यर्थी को सरकारी सेवा से स्थायी रूप से वंचित नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से तब, जब उसने नियुक्ति के समय लंबित आपराधिक मामले की जानकारी स्वयं ईमानदारी से दी हो। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए बीएसएफ अधिकारियों को राहुल जाटव को सभी परिणामी लाभों के साथ सेवा में पुनः बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
शिवपुरी निवासी राहुल जाटव ने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) की जीडी कांस्टेबल परीक्षा-2022 उत्तीर्ण कर मेरिट के आधार पर बीएसएफ में कॉन्स्टेबल (GD) पद पर चयन प्राप्त किया था। 28 अगस्त 2023 को उन्हें नियुक्ति पत्र जारी हुआ और 27 अक्टूबर 2023 को उन्होंने इंदौर स्थित बीएसएफ के प्रशिक्षण केंद्र में ज्वाइन कर लिया।
ज्वाइनिंग के दौरान सत्यापन प्रक्रिया में राहुल जाटव ने स्वयं बताया कि उनके विरुद्ध थाना कोतवाली, शिवपुरी में आईपीसी की धारा 323, 325, 294 एवं 34 के तहत एक आपराधिक मामला लंबित है।
इसी लंबित प्रकरण के आधार पर बीएसएफ ने 22 नवंबर 2023 को उनकी अस्थायी नियुक्ति निरस्त कर दी।
छह दिन बाद ही कोर्ट से बरी
सेवा समाप्ति के मात्र छह दिन बाद, 28 नवंबर 2023 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, शिवपुरी ने आपराधिक मामले में साक्ष्यों के अभाव में राहुल जाटव को बरी कर दिया।
इसके बाद उन्होंने अपनी बहाली के लिए अधिकारियों को आवेदन दिया, लेकिन 9 फरवरी 2024 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया गया कि उन्हें "बेनिफिट ऑफ डाउट" के आधार पर बरी किया गया है और विभागीय नीति के अनुसार उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने कहा- कर्मचारी पर नियम लागू नहीं
खंडपीठ ने कहा कि जिस विभागीय सर्कुलर का हवाला देकर नियुक्ति रद्द की गई, वह केवल भर्ती प्रक्रिया के दौरान विचाराधीन अभ्यर्थियों पर लागू होता है। राहुल जाटव उस समय केवल उम्मीदवार नहीं थे, बल्कि नियुक्ति प्राप्त कर सेवा ज्वाइन कर चुके थे।
कोर्ट ने कहा कि भर्ती चरण और नियुक्ति के बाद की स्थिति में स्पष्ट अंतर है। ऐसे में भर्ती संबंधी अयोग्यता के नियमों को पहले से नियुक्त कर्मचारी पर लागू नहीं किया जा सकता।
'मोटरसाइकिल के हॉर्न को लेकर हुआ था विवाद'
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरा विवाद मोटरसाइकिल का हॉर्न बजाने जैसी मामूली बात से शुरू हुआ था। आरोप भी आईपीसी की धारा 323, 325 और 294 जैसे गैर-जघन्य अपराधों से संबंधित थे।
कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों से यह नहीं माना जा सकता कि अभ्यर्थी का चरित्र ऐसा है जिससे वह अनुशासित बल में सेवा के अयोग्य हो जाए। ऐसे मामलों को सरकारी नौकरी से स्थायी वंचित करने का आधार बनाना मनमाना और अनुचित होगा।
एकलपीठ के आदेश को बताया त्रुटिपूर्ण
खंडपीठ ने माना कि एकलपीठ ने भर्ती स्तर पर लागू होने वाले दिशा-निर्देशों को ऐसे व्यक्ति पर लागू कर दिया, जो पहले ही नियुक्त होकर प्रशिक्षण शुरू कर चुका था। साथ ही मामले की प्रकृति और बाद में हुई बरी होने की परिस्थितियों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में—
- एकलपीठ का 11 नवंबर 2024 का आदेश निरस्त कर दिया।
- 22 नवंबर 2023 की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया।
- 9 फरवरी 2024 को बहाली से इनकार करने वाला आदेश भी निरस्त कर दिया।
- बीएसएफ को राहुल जाटव को सभी परिणामी लाभों (Consequential Benefits) के साथ सेवा में पुनः बहाल करने के निर्देश दिए।
