रामपुर के डेलीमा कंपाउंड स्थित शिव मंदिर की उम्र को लेकर विवाद; कोर्ट ने कलेक्टर से पुरातत्व या अन्य विभाग से जांच कराने को कहा, दस्तावेजों की भी होगी पड़ताल
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
जबलपुर के रामपुर चौक के पास डेलीमा कंपाउंड में स्थित भगवान शिव का मंदिर आखिर कितना पुराना है? क्या यह मंदिर करीब 200 साल पुराना और पुरातात्विक महत्व का है या फिर इसका निर्माण वर्ष 1942 में कराया गया था? इस विवाद की सच्चाई का पता लगाने के लिए जबलपुर जिला अदालत ने जांच के आदेश दिए हैं।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) श्वेता खरे की अदालत ने जबलपुर कलेक्टर को भारतीय पुरातत्व विभाग या किसी अन्य सक्षम विभाग के माध्यम से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच में मंदिर के निर्माण की वास्तविक अवधि के साथ उसके क्षेत्रफल का भी पता लगाया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी।
शिव मंदिर को लेकर दो पक्षों के अलग-अलग दावे
अदालत ने यह आदेश ऊषा डेलीमा की ओर से अंजू भार्गव के खिलाफ दायर सिविल सूट की सुनवाई के दौरान दिया। डेलीमा कंपाउंड में स्थित शिव मंदिर को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। ऊषा डेलीमा का दावा है कि मंदिर का निर्माण उनके दादा स्वर्गीय साइमन डेलीमा ने कराया था। वहीं अंजू भार्गव का दावा है कि यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है और इसका पुरातात्विक महत्व भी है। दोनों पक्षों के दावों में मंदिर के निर्माण की अवधि को लेकर बड़ा अंतर होने के कारण मामला अदालत तक पहुंचा है।
कमीशन बनाकर सच्चाई पता लगाने की मांग
अंजू भार्गव की ओर से अदालत में एक आवेदन पेश कर मंदिर के निर्माण की वास्तविक अवधि का पता लगाने के लिए कमीशन गठित करने की मांग की गई। आवेदन में कहा गया कि जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जा सकता है कि मंदिर वास्तव में कब बनाया गया था और उसके ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक पहलुओं की वास्तविक स्थिति क्या है। अदालत ने पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद मंदिर के निर्माण की अवधि का पता लगाने के लिए जांच कराने के निर्देश दिए।
पुरातत्व या अन्य विभाग से होगी जांच
कोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि भारतीय पुरातत्व विभाग या किसी अन्य सक्षम विभाग के माध्यम से मंदिर की जांच कराई जाए। जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि शिव मंदिर का निर्माण वर्ष 1942 में हुआ था या उससे पहले। इसके साथ मंदिर वर्तमान में कितने क्षेत्रफल में बना हुआ है, इसका भी परीक्षण किया जाएगा।
दोनों पक्षों के दस्तावेज भी जांचे जाएंगे
अदालत ने जांच के दौरान केवल मंदिर की भौतिक स्थिति देखने के बजाय दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की भी जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच करने वाला आयोग उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कर मंदिर के निर्माण की अवधि के संबंध में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर मंदिर की वास्तविक उम्र से जुड़े विवाद की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कोर्ट में इन अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष
मामले में ऊषा डेलीमा की ओर से अधिवक्ता बीएस खरे ने पक्ष रखा। अंजू भार्गव की ओर से अधिवक्ता शांतनु अयाची और आदर्श हीरा ने दलीलें पेश कीं, जबकि राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अनिल तिवारी उपस्थित हुए। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मंदिर के निर्माण की अवधि और क्षेत्रफल की जांच कराने के निर्देश दिए। मामले पर अब 11 अगस्त 2026 को अगली सुनवाई होगी।
