LAW'S VERDICT

12 लाख कमाओ, तभी बनोगे सीनियर एडवोकेट? MP हाईकोर्ट के नियम को चुनौती

12 लाख की ITR की शर्त को भोपाल के वकील ने दी चुनौती, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए लगातार तीन वर्षों तक न्यूनतम 12 लाख रुपये की आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अनिवार्यता को चुनौती दी गई है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल और राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने भोपाल निवासी अधिवक्ता राजेश नेमा की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए निर्धारित आय संबंधी शर्त की संवैधानिकता पर सवाल उठाया गया है।

17 मार्च 2026 के नोटिफिकेशन को दी चुनौती

याचिका के अनुसार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 17 मार्च 2026 को सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन से संबंधित नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें पात्रता के लिए यह शर्त रखी गई कि आवेदन करने वाले अधिवक्ता ने लगातार तीन वर्षों तक कम से कम 12 लाख रुपये की आय दर्शाते हुए आयकर रिटर्न दाखिल की हो। अधिवक्ता राजेश नेमा ने इसी आय संबंधी शर्त को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

योग्य वकीलों के वंचित होने का दिया तर्क

मामले में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये स्वयं पैरवी करते हुए अधिवक्ता राजेश नेमा ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि 12 लाख रुपये की ITR की अनिवार्यता के कारण कई योग्य, अनुभवी और वरिष्ठ अधिवक्ता सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन की प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं से गरीब और जरूरतमंद लोगों को अधिक से अधिक नि:शुल्क कानूनी सहायता (Pro Bono Legal Services) देने की अपेक्षा की जाती है। दूसरी ओर सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए आय की इतनी अधिक सीमा निर्धारित करना उचित नहीं है।

अनुच्छेद 14 के उल्लंघन का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि देश के अन्य राज्यों में सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए इस तरह की न्यूनतम आय संबंधी बाध्यता नहीं है। याचिका में दावा किया गया कि मध्य प्रदेश में 12 लाख रुपये की ITR की शर्त लागू करना भेदभावपूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार के विपरीत है।

हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

मामले में प्रारंभिक सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और राज्य शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब पेश करने को कहा है। मामले में अब संबंधित पक्षों का जवाब आने के बाद आगे सुनवाई होगी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-28492-2026

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