LAW'S VERDICT

मध्य प्रदेश में शुरू हुआ पहला मेडिएशन सर्टिफिकेट कोर्स, अदालतों का बोझ घटाने की दिशा में बड़ा कदम

MPSLSA और DNLU के बीच हुआ MoU, एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने किया शुभारंभ

जबलपुर। मध्य प्रदेश में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) व्यवस्था को मजबूत बनाने और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की गई है। Madhya Pradesh State Legal Services Authority और Dharmashastra National Law University के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत तीन माह का विशेष सर्टिफिकेट कोर्स “Mediation: Transforming Conflict into Consensus” शुरू किया गया है।

इस पाठ्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने किया। कार्यक्रम में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विवेक अग्रवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

संवाद और सहमति से सुलझेंगे विवाद

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया ने कहा कि अदालतों में बढ़ते मुकदमों के बीच मध्यस्थता (Mediation) विवाद निपटान का प्रभावी और व्यावहारिक माध्यम बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को संवाद और सहमति के माध्यम से विवाद सुलझाने के लिए सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है और यह कोर्स उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

जस्टिस आनंद पाठक ने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मानवीय व्यवस्था है जो रिश्तों, सम्मान और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखते हुए समाधान प्रदान करती है।

वहीं जस्टिस विवेक अग्रवाल ने अधिवक्ताओं और कानूनी पेशेवरों से अपील की कि वे मध्यस्थता को अंतिम विकल्प नहीं बल्कि “फर्स्ट रिजॉर्ट” के रूप में अपनाएं।

क्या है इस कोर्स की खासियत?

240 घंटे का व्यापक प्रोग्राम: यह कोर्स 3 महीने का होगा, जिसमें 144 घंटे थ्योरी (मेडिएशन एक्ट 2023, विवाद का मनोविज्ञान, नेगोशिएशन), 48 घंटे व्यावहारिक प्रशिक्षण और 48 घंटे फील्ड एक्सपोजर (लाइव कोर्ट मध्यस्थता देखना) शामिल हैं।

 सुप्रीम कोर्ट के ट्रेनर्स देंगे ट्रेनिंग: इस पाठ्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट की 'मेडिएशन एंड कन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी' (MCPC) से मान्यता प्राप्त है। इसके तहत 40 घंटे की विशेष ट्रेनिंग सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त सीनियर ट्रेनर्स देंगे।

 अगस्त 2026 से पहला बैच: यह कोर्स साल में तीन बार संचालित होगा। पहला बैच अगस्त 2026 से शुरू होगा, जिसमें वकील, न्यायिक अधिकारी, कानून के छात्र, समाज सेवक, एनजीओ और प्रशासनिक अधिकारी भाग ले सकेंगे।

 सीधे कोर्ट से जुड़ने का मौका: कोर्स पूरा करने के बाद योग्य उम्मीदवारों को विधिक सेवा संस्थानों में पैनलबद्ध (Empanelled) किया जाएगा, जिससे वे अदालतों में लंबित मामलों को आपसी समझौते से सुलझाने में मदद कर सकेंगे।

कोर्स में Mediation Act 2023, विवादों का मनोविज्ञान, वार्ता कौशल (Negotiation Skills) और सहमति-आधारित समाधान की तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा।

अगस्त 2026 से शुरू होगा पहला बैच

कोर्स का पहला बैच अगस्त 2026 से प्रारंभ होगा। यह कार्यक्रम वर्ष में तीन बार संचालित किया जाएगा। इसमें अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, कानून के विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता, एनजीओ प्रतिनिधि तथा प्रशासनिक अधिकारी भाग ले सकेंगे।

कोर्स पूरा करने वालों को मिलेगा अदालतों से जुड़ने का अवसर

पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को विधिक सेवा संस्थानों में पैनलबद्ध (Empanelled) किया जाएगा। इसके बाद वे अदालतों में लंबित मामलों को आपसी समझौते और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने में सहयोग कर सकेंगे।

कार्यक्रम में प्रमुख लोग मौजूद रहे

कार्यक्रम के दौरान DNLU के कुलपति प्रो. मनोज कुमार सिन्हा और MPSLSA की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव ने औपचारिक रूप से MoU पर हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्रा, मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक उमेश पांडव सहित प्रदेशभर के जिला जज, सचिव और विधिक सहायता अधिकारी ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम का संचालन उप सचिव अनिरुद्ध जैन ने किया और आभार प्रदर्शन DNLU के रजिस्ट्रार डॉ. प्रवीण त्रिपाठी ने किया।

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