जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर (कंप्यूटर विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2024 के परिणामों को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जे.के. पिल्लई की वेकेशन बेंच ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) को भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित करने की सशर्त अनुमति प्रदान की है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि जिन अभ्यर्थियों ने इस भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की हैं, उनके परिणाम सीलबंद लिफाफे (Sealed Cover) में सुरक्षित रखे जाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
21 याचिकाओं में भर्ती विज्ञापन को चुनौती
मामले में छतरपुर के अतिथि विद्वान हरचंडी अहिरवार सहित अन्य अभ्यर्थियों ने याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं में उच्च शिक्षा विभाग और एमपीपीएससी द्वारा 24 एवं 30 दिसंबर 2024 को जारी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विज्ञापनों को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियां निम्न हैं—
- अनुभव के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत अंकों के प्रावधान पर सवाल।
- आरक्षण से संबंधित लाभ नहीं दिए जाने का आरोप।
- भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत के उल्लंघन का दावा।
पहले इंटरव्यू में शामिल करने का दिया था आदेश
इस मामले में 17 मार्च 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था कि जिन याचिकाकर्ताओं ने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, उन्हें साक्षात्कार (इंटरव्यू) में शामिल होने दिया जाए।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि न्यायालय की अनुमति के बिना इंटरव्यू के परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे।
एमपीपीएससी ने मांगी थी अनुमति
मार्च के अंतरिम आदेश के बाद एमपीपीएससी ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर कहा कि परिणाम जारी न कर पाने के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। आयोग ने अदालत से परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी तथा एमपीपीएससी की ओर से अधिवक्ता आदित्य पचौरी ने पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि लंबित अंतरिम आदेश के कारण चयन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
वेकेशन बेंच ने आयोग की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि—
- जिन उम्मीदवारों ने कोई याचिका दायर नहीं की है, उनके परिणाम घोषित किए जा सकते हैं।
- याचिकाकर्ताओं के परिणाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे।
- उनके परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखे जाएंगे और आगे न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।
क्या है इस आदेश का महत्व?
इस आदेश से एमपीपीएससी को अधिकांश अभ्यर्थियों के परिणाम जारी कर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है। वहीं, याचिकाकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उनके परिणामों को सीलबंद रखने का निर्देश दिया गया है। अंतिम निर्णय आने तक उनकी चयन स्थिति न्यायालय के आदेश पर निर्भर रहेगी।
यह मामला अब भी विचाराधीन है और अनुभव अंक तथा आरक्षण संबंधी मुद्दों पर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय कर सकता है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-5489-2025
