LAW'S VERDICT

स्कूल शिक्षक और अतिथि विद्वान समान नहीं, आयुसीमा छूट की मांग पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत नियमित शिक्षक और डिग्री कॉलेजों में सेवाएं देने वाले अतिथि विद्वान (गेस्ट फैकल्टी) दो अलग-अलग वर्ग हैं। इसलिए दोनों को समान मानकर भर्ती प्रक्रियाओं में एक जैसी सुविधाएं या छूट देने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। जस्टिस देव नारायण मिश्रा की वेकेशन बेंच ने इसी आधार पर आयुसीमा में छूट की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को वैध ठहराया।

क्या था मामला?

याचिका गुना निवासी उच्च माध्यमिक शिक्षक डॉ. रवि मिश्रा, डॉ. सुषमा मिश्रा तथा शहडोल की डॉ. अपर्णा पाठक की ओर से दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि 30 दिसंबर 2025 को एमपीपीएससी ने माध्यमिक शिक्षक भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में डिग्री कॉलेजों में कार्यरत अतिथि विद्वानों को आयुसीमा में विशेष छूट प्रदान की गई थी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि आयुसीमा में छूट का आधार अध्यापन अनुभव है और वे स्वयं भी लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इसलिए उन्हें भी वही लाभ मिलना चाहिए जो अतिथि विद्वानों को दिया गया है।

भेदभाव का लगाया आरोप

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आयोग केवल इस आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता कि एक वर्ग उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को पढ़ाता है, जबकि दूसरा वर्ग डिग्री कॉलेजों के छात्रों को शिक्षण देता है। उन्होंने इस प्रावधान को भेदभावपूर्ण बताते हुए संबंधित विज्ञापन को निरस्त करने की मांग की थी।

शासकीय अधिवक्ता ने किया विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पाण्डेय ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दोनों श्रेणियों की नियुक्ति, कार्यप्रणाली और सेवा परिस्थितियां अलग हैं। अतिथि विद्वानों को दी गई छूट एक विशेष नीति के तहत प्रदान की गई है और इसे विद्यालय शिक्षकों तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने माना- दोनों अलग वर्ग 

मामले पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि:

  • उच्च माध्यमिक विद्यालयों के नियमित शिक्षक और डिग्री कॉलेजों के अतिथि विद्वान अलग-अलग वर्ग हैं।
  • दोनों की सेवा प्रकृति, कार्यक्षेत्र और नियुक्ति व्यवस्था में स्पष्ट अंतर है।
  • इसलिए दोनों की तुलना कर समान लाभ की मांग नहीं की जा सकती।
  • एमपीपीएससी द्वारा निर्धारित आयुसीमा छूट का प्रावधान मनमाना या भेदभावपूर्ण नहीं है।

इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी और भर्ती विज्ञापन को वैध माना।

भर्ती नीतियों पर पड़ेगा प्रभाव

यह निर्णय भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अलग-अलग सेवा वर्गों के कर्मचारियों को केवल शिक्षण कार्य के आधार पर समान नहीं माना जा सकता। भर्ती नियमों और विशेष छूटों का मूल्यांकन संबंधित वर्ग की सेवा प्रकृति और नीति के उद्देश्य के आधार पर किया जाएगा। 


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-18856-2026

Post a Comment

Previous Post Next Post