पत्रकार की जनहित याचिका पर सुनवाई
अनूपपुर जिले के बिजुरी निवासी पत्रकार प्रकाश सिंह परिहार द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिले की 18 रेत खदानों (कुल क्षेत्रफल 89.421 हेक्टेयर) के संचालन के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया आयोजित की गई थी। इसमें नर्मदापुरम के पिपरिया स्थित फर्म एसोसिएट कॉमर्स ने लगभग 17.75 करोड़ रुपये की सर्वाधिक वार्षिक बोली लगाकर ठेका प्राप्त किया।
याचिका के अनुसार, खनिज विभाग द्वारा ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ जारी किए जाने के बाद कोतमा तहसील के ग्राम गोहन्द्रा स्थित आराजी नंबर 843, 846 एवं 847 की भूमि पर रेत उत्खनन शुरू किया गया। आरोप है कि खनन कार्य के दौरान ठेकेदार ने केवई नदी की मुख्य जलधारा के बीच अस्थायी सड़क का निर्माण कर दिया, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित और अवरुद्ध हो गया।
पर्यावरणीय नुकसान का आरोप
याचिकाकर्ता का कहना है कि नदी की धारा रोके जाने से स्थानीय पर्यावरण, जलीय पारिस्थितिकी और जल प्रवाह प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस संबंध में प्रशासन और संबंधित विभागों को कई शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट की शरण ली गई।
हाईकोर्ट ने मांगे दो महत्वपूर्ण जवाब
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मेन्द्र प्रसाद पाठक तथा राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने पक्ष रखा।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से निम्न दो बिंदुओं पर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है—
- क्या रेत ठेकेदार द्वारा किए जा रहे खनन कार्य के कारण केवई नदी के पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित या रोका गया है?
- क्या रेत के भंडारण और खनन गतिविधियों में निर्धारित नियमों एवं वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है?
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा अहम मामला
यह मामला केवल रेत खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। यदि जांच में जलधारा अवरुद्ध करने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बन सकती है। अब राज्य सरकार के जवाब और आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-19527-2026
