डिवीजन बेंच ने टेंडर शर्तों को चुनौती देने वाली मांगें खारिज कीं, कहा- वैध D-1 लाइसेंस के बिना टेंडर में भागीदारी का अधिकार नहीं
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने Som Distilleries Pvt. Ltd. को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार की देशी शराब थोक आपूर्ति निविदा (Liquor Tender) में तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कहा कि कंपनी के पास फिलहाल वैध D-1 लाइसेंस नहीं है और उसकी तकनीकी बोली (Technical Bid) भी निरस्त हो चुकी है। इसलिए उसे टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं बनता।
हालांकि, कंपनी के लाइसेंस नवीनीकरण (Renewal) आवेदन को खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाला विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने उस हिस्से की सुनवाई के लिए मामले को सिंगल बेंच के समक्ष भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड ने आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना द्वारा जारी 12 जून 2026 की शराब टेंडर (NIT) की शर्तों तथा 18 जून 2026 को पारित लाइसेंस नवीनीकरण निरस्तीकरण आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
कंपनी का कहना था कि उसके नवीनीकरण आवेदन को पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर खारिज किया गया ताकि वह राज्य की नई शराब टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो जाए।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रुपराह और उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने दलील दी थी कि आबकारी लाइसेंस का नवीनीकरण किसी का मौलिक या अर्जित अधिकार नहीं है। सक्षम प्राधिकारी आवेदक की पृष्ठभूमि, वित्तीय दायित्व, वैधानिक अनुपालन तथा अन्य तथ्यों की जांच करने के बाद ही निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
सरकार ने यह भी बताया कि जांच के दौरान कंपनी द्वारा गलत घोषणाएं, लंबित शासकीय देनदारियों और अन्य अनियमितताओं सहित कई गंभीर कमियां सामने आई थीं, जिसके बाद विस्तृत कारणयुक्त आदेश पारित किया गया।
तकनीकी बोली भी हो चुकी है खारिज
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह ने अदालत को बताया कि कंपनी की तकनीकी बोली पहले ही अस्वीकार की जा चुकी है। साथ ही, कंपनी ने तकनीकी बोली निरस्त किए जाने के आदेश को याचिका में चुनौती भी नहीं दी। अदालत ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि कंपनी अब टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो चुकी है।
वैध D-1 लाइसेंस के बिना नहीं मिल सकती राहत
हाईकोर्ट ने कहा कि टेंडर की शर्त के अनुसार प्रत्येक बोलीदाता के पास वैध एवं प्रभावी D-1 लाइसेंस होना अनिवार्य है। चूंकि फिलहाल कंपनी के पास ऐसा लाइसेंस नहीं है, इसलिए टेंडर संबंधी राहतें नहीं दी जा सकतीं।
सिंगल बेंच करेगी लाइसेंस विवाद की सुनवाई
डिवीजन बेंच ने याचिका में टेंडर से संबंधित राहतों को खारिज कर दिया। हालांकि 18 जून 2026 को लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन खारिज किए जाने के आदेश की वैधता से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई अभी शेष है।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस विवाद को सुनवाई के लिए सिंगल बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-22400-2026
