LAW'S VERDICT

नकली दूध-पनीर के करोड़ों के खेल में गायत्री फूड्स के डायरेक्टर किशन मोदी को जमानत नहीं

ED द्वारा गिरफ्तार किये गए किशन मोदी की अर्जी हाईकोर्ट ने ठुकराई

जबलपुर। नकली दूध, पनीर, घी और अन्य डेयरी उत्पादों के जरिए करोड़ों रुपये के कथित काले कारोबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग कोई साधारण अपराध नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की वित्तीय व्यवस्था और संप्रभुता पर पड़ता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मेसर्स जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल के डायरेक्टर किशन मोदी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

बुधवार 3 जून को हुई सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा फैसला जस्टिस देवनारायण मिश्रा की वेकेशन बेंच ने शनिवार की शाम को जारी किया। अपने विस्तृत फैसले में जस्टिस मिश्रा ने माना कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री आरोपी की भूमिका की गंभीरता को दर्शाती है, इसलिए उसे फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।

15 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप

मामला भोपाल स्थित गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. से जुड़ा है, जो मिल्क मैजिक ब्रांड नाम से डेयरी उत्पादों का निर्माण करती है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार कंपनी के प्रबंध निदेशक किशन मोदी पर आरोप है कि उन्होंने दूध से प्राकृतिक फैट निकालकर उसकी जगह पाम ऑयल और अन्य पदार्थ मिलाकर मिलावटी उत्पाद तैयार किए। इन उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों में भी बेचा गया।

जांच एजेंसी का दावा है कि इस कथित कारोबार से करीब 20 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई, जबकि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा लेन-देन 15 करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया।

ईडी जांच में सामने आया कथित मिलावट का खेल

ईडी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विक्रम सिंह ने वेकेशन बेंच को बताया कि जांच के दौरान कंपनी के प्लांट में बड़े पैमाने पर पाम ऑयल की खरीद के दस्तावेज मिले। जांच एजेंसी के अनुसार प्लांट में लाखों किलोग्राम पाम ऑयल का उपयोग किया जाता था।

आरोप है कि रात के समय केमिकल और पाम ऑयल के टैंकर प्लांट में पहुंचते थे, जहां उनसे मक्खन, पनीर, मिल्क क्रीम और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार किए जाते थे। बाद में इन्हें शुद्ध डेयरी उत्पाद बताकर बाजार में बेचा जाता था।

फर्जी लैब रिपोर्ट के जरिए निर्यात का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि कथित मिलावटी उत्पादों को वैध साबित करने के लिए लैब परीक्षण रिपोर्टों में हेरफेर की गई।

ईडी के मुताबिक फर्जी या संशोधित परीक्षण रिपोर्टों के आधार पर लगभग 90 लाख रुपये मूल्य के डेयरी उत्पाद विभिन्न देशों में निर्यात किए गए। एजेंसी का दावा है कि इस प्रकार की गतिविधियों से भारत की खाद्य गुणवत्ता संबंधी साख को भी नुकसान पहुंचा।

'मुझे जानकारी नहीं थी' वाली दलील खारिज

किशन मोदी की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि कथित अनियमितताओं के लिए कंपनी के पूर्व सीईओ सुनील त्रिपाठी जिम्मेदार थे और उन्होंने स्वयं दस्तावेजों में गड़बड़ी स्वीकार की है। यह भी कहा गया कि आरोपी स्वयं पीड़ित है और उसने ही सबसे पहले शिकायत दर्ज कराई थी।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने कहा कि जिस स्तर पर पाम ऑयल की खरीद, केमिकल मिश्रण, फर्जी इनवॉइस और उत्पादन प्रक्रिया संचालित हो रही थी, उसे देखते हुए कंपनी के डायरेक्टर का इससे पूरी तरह अनजान होना प्रथम दृष्टया स्वीकार्य नहीं लगता।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों को सामान्य अपराधों की तरह नहीं देखा जा सकता। ऐसे अपराधों का प्रभाव व्यापक होता है और वे आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने किशन मोदी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही आरोपी को फिलहाल ईडी की गिरफ्त में ही रहना होगा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      MCRC No-18927/2026

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