दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस कौरव का जबलपुर बार में आत्मीय संबोधन, बोले- हर कदम से जुड़ी हैं यादें
जबलपुर। जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट परिसर और जबलपुर बार से अपने गहरे भावनात्मक जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि इस परिसर के हर कदम पर उनकी अनगिनत यादें जुड़ी हुई हैं। यहां के अधिवक्ताओं के साथ उनका रिश्ता केवल पेशेवर नहीं, बल्कि आत्मीय और अटूट है, जो जीवनभर बना रहेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कौरव ने ये बातें हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा सोमवार को उनके सम्मान में आयोजित अभिनंदन समारोह में कहीं। उनके संबोधन के दौरान बार के अनेक वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ता भावुक नजर आए।
‘यह मेरा अपना घर है’
जस्टिस कौरव ने कहा कि न्यायाधीश बनने से पहले वो इसी बार के सक्रिय सदस्य रहे हैं और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन और कानूनी करियर को नई दिशा मिली थी।
उन्होंने कहा, “हाईकोर्ट बार को मैं अपना घर मानता हूँ। यहां के वकीलों के प्रति मेरे मन में जो स्नेह और सम्मान है, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। शायद यही कारण है कि मैं बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक अपने इस घर में चला आया।”
उन्होंने याद दिलाया कि हाईकोर्ट बार में सह सचिव चुने जाने के बाद ही उन्हें उप महाधिवक्ता बनने का अवसर मिला था।
सिल्वर जुबली हॉल में हुआ सम्मान समारोह
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सिल्वर जुबली हॉल में आयोजित कार्यक्रम में बार के कार्यकारी अध्यक्ष अमित जैन, सह सचिव योगेश सोनी, वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र श्रीवास्तव और अनिल खरे सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
इस अवसर पर बार एसोसिएशन की ओर से जस्टिस कौरव को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सचिव परितोष त्रिवेदी ने किया।
सबसे पहले किए हनुमान जी के दर्शन
जबलपुर से दिल्ली हाईकोर्ट तक का सफर
जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव ने वर्ष 2001 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर से अपने अधिवक्ता जीवन की शुरुआत की थी। लगभग दो दशकों तक वकालत के दौरान उन्होंने उप महाधिवक्ता, अतिरिक्त महाधिवक्ता और बाद में महाधिवक्ता के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्हें 8 अक्टूबर 2021 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। बाद में 2 जून 2022 को उनका स्थानांतरण Delhi High Court में कर दिया गया, जहां वे वर्तमान में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

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