LAW'S VERDICT

गोलबाजार अतिक्रमण मामला: पार्षद अयोध्या तिवारी को हाईकोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत

अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 19 जून को अगली सुनवाई

जबलपुर। गोलबाजार क्षेत्र में नगर निगम की करोड़ों रुपये मूल्य की कथित सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों का सामना कर रहे स्थानीय पार्षद अयोध्या तिवारी और उनके परिवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच से फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। अदालत ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए अगली सुनवाई 19 जून 2026 को निर्धारित की है।

जस्टिस प्रणय वर्मा एवं जस्टिस जेके पिल्लई की वेकेशन बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने किसी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इंकार करते हुए प्रकरण को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

12 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप

मामले की शुरुआत गोलबाजार निवासी जयदीप शाह द्वारा दायर याचिका से हुई थी, जिसमें क्षेत्र में फैले अतिक्रमणों को चुनौती दी गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 6 मार्च 2026 को प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए थे।

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की पीठ ने जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को जांच कर 22 जून 2026 तक क्षेत्र के सभी अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे।

इसके बाद अमित जैन द्वारा हाईकोर्ट में यह आरोप लगाया गया कि स्थानीय पार्षद अयोध्या तिवारी ने गोलबाजार क्षेत्र में नगर निगम की लगभग 12 हजार वर्गफीट सरकारी भूमि पर कब्जा कर रखा है। अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए 15 मई 2026 को नगर निगम आयुक्त को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

पार्षद ने परिवार के साथ दाखिल किया आवेदन

नगर निगम की संभावित कार्रवाई के बीच पार्षद अयोध्या तिवारी ने अपनी मां और दो भाइयों के साथ हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर मामले में अपना पक्ष रखने और राहत देने की मांग की है।

बुधवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंकुश जैन, राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा, नगर निगम की ओर से अधिवक्ता सौरभ सुंदर, शिकायतकर्ता अमित जैन की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा तथा पार्षद की ओर से अधिवक्ता सी.वी. राव ने पक्ष रखा।

19 जून को फिर होगी सुनवाई

वेकेशन बेंच ने सभी पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और मामले को विस्तृत सुनवाई के लिए 19 जून 2026 को सूचीबद्ध कर दिया।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाईकोर्ट पहले ही गोलबाजार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दे चुका है। ऐसे में अगली सुनवाई में पार्षद और उनके परिवार की ओर से प्रस्तुत दावों तथा नगर निगम की कार्रवाई पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-1174-2026

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