LAW'S VERDICT

MP हाईकोर्ट ने सरकार और नगर निगम से पूछा- कैसे दूर होगा इंदौर में जलसंकट?

जनहित याचिका पर 4 दिनों में मांगा जवाब, 8 जून को फिर होगी सुनवाई 

जबलपुर/इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने Indore में गहराते जल संकट और भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जानकारी तलब की है। जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जेके पिल्लई की अवकाशकालीन पीठ ने बुधवार को हुई सुनवाई के बाद कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे गंभीर सार्वजनिक महत्व के हैं और नागरिकों के स्वच्छ जल के अधिकार से जुड़े हुए हैं।

याचिका राजलक्ष्मी फाउंडेशन द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इंदौर जिले में भूजल का अत्यधिक दोहन, जलाशयों पर अतिक्रमण, वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) नियमों के पालन में विफलता तथा झीलों एवं तालाबों के संरक्षण में प्रशासनिक लापरवाही के कारण गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है।

याचिका में क्या कहा गया?

याचिका के अनुसार, केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) ने इंदौर को गंभीर भूजल दोहन वाले क्षेत्रों में चिन्हित किया है। भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई क्षेत्रों में हजार फीट से अधिक गहराई तक बोरिंग करनी पड़ रही है। याचिकाकर्ता का दावा है कि शहर अपनी सतत क्षमता से अधिक भूजल का दोहन कर रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जल निकायों, तालाबों, बावड़ियों, प्राकृतिक नालों और रिचार्ज क्षेत्रों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए सरकार और स्थानीय निकायों ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जिससे नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगाड़िया और अधिवक्ता आयुष कुमार चौधरी उपस्थित हुए। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता आदित्य गर्ग तथा नगर निगम की ओर से अधिवक्ता कमल नयन ऐरेन ने पक्ष रखा।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे इंदौर में वर्तमान जल संकट की स्थिति और उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों संबंधी निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई पर जानकारी प्रस्तुत करें।

साथ ही नगर निगम के अधिवक्ता को भी निर्देशित किया गया कि वे यह बताएं कि याचिका में मांगी गई अंतरिम राहत क्रमांक 13.6 और 13.7 के संबंध में अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो यह भी स्पष्ट किया जाए कि उन्हें लागू करने में कितना समय लगेगा।

8 जून को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले को 8 जून 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

यह जनहित याचिका केवल किसी एक प्रशासनिक आदेश को चुनौती नहीं देती, बल्कि इंदौर की जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, जलाशयों के पुनर्जीवन और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े व्यापक मुद्दों को उठाती है। यदि अदालत इस मामले में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करती है, तो इसका प्रभाव पूरे जिले की जल प्रबंधन नीति पर पड़ सकता है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-19600-2026

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