जनहित याचिका पर मप्र हाईकोर्ट का बड़ा अंतरिम आदेश, प्रशासन और विभागों को जारी नोटिस
जबलपुर। Madhya Pradesh High Court ने नर्मदा नदी के खिरहनी घाट में हो रहे कथित अवैध रेत उत्खनन और दुर्लभ महाशीर मछली के शिकार पर सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को होगी।
खिरहनी घाट में अवैध गतिविधियों का आरोप
जबलपुर के विजय नगर निवासी सिविल इंजीनियर अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि खिरहनी गांव क्षेत्र में नर्मदा नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है। साथ ही राज्य मछली घोषित महाशीर प्रजाति का खुलेआम शिकार भी हो रहा है।
याचिका में कहा गया कि वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश सरकार ने महाशीर को राज्य मछली का दर्जा दिया था, लेकिन उसके संरक्षण के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उल्टा प्रशासनिक लापरवाही के कारण उसके शिकार को खुली छूट मिल गई है।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिकाकर्ता के अनुसार संबंधित अधिकारियों को कई शिकायतें दी गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। याचिका में मछली पालन विभाग, खनिज विभाग, कलेक्टर जबलपुर, ईओडब्ल्यू एसपी और निजी पक्षकार को प्रतिवादी बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और ईशान त्रिपाठी ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सभी अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए अवैध रेत उत्खनन और महाशीर मछली के शिकार पर अंतरिम रोक लगा दी।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा अहम मामला
नर्मदा नदी में अवैध खनन और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों पर हाईकोर्ट की यह सख्ती पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासतौर पर महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति की सुरक्षा को लेकर यह आदेश दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-18250-2026
