LAW'S VERDICT

अदालतों को भी 24×7 व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा : CJI सूर्यकांत

मप्र हाईकोर्ट के 6 सॉफ्टवेयर को लांच करके प्रधान न्यायाधीश ने कहा- 

जबलपुर।  सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि जिस प्रकार अस्पताल चौबीसों घंटे सेवाएं देते हैं, उसी तरह न्यायपालिका को भी अब सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि तभी आम नागरिकों को त्वरित न्याय देने की अवधारणा वास्तव में सफल हो सकेगी।

जबलपुर में आयोजित “फ्रेगमेन्टेशन टू फ्यूजन: एमपॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटिग्रेशन” कार्यक्रम में मप्र हाईकोर्ट द्वारा विकसित छह डिजिटल सॉफ्टवेयरों का लोकार्पण करते हुए सीजेआई ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की यह पहल देश में पहली है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि कोविड काल में जब पूरा देश ठहर गया था, तब केवल न्यायपालिका ही ऐसी संस्था थी जिसने तकनीक के सहारे तालुका अदालतों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक ऑनलाइन सुनवाई जारी रखी। तकनीक आधारित न्यायिक व्यवस्था की विश्वभर में सराहना हुई।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तकनीकी सुधारों की सराहना की

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से न्याय व्यवस्था का विशेष महत्व रहा है और आधुनिक तकनीक ने न्याय प्रक्रिया को अधिक सरल तथा जनसुलभ बनाया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार सुशासन के लिए साइबर तहसीलों, पेपरलेस प्रशासन और डिजिटल मंत्रीपरिषद जैसी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ा रही है।

“डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों का जीवन आसान बनाएंगे” 

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि सीजेआई के मार्गदर्शन में तैयार डिजिटल प्लेटफॉर्म न्यायिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तेज बनाएंगे। उन्होंने बताया कि ई-समन, ऑनलाइन दस्तावेजीकरण और डिजिटल इंटीग्रेशन से जमानत प्रकरणों के निराकरण में तेजी आई है।

सुप्रीम कोर्ट में दो दिन वर्क फ्रॉम होम पर फोकस

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा  ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट ने सप्ताह में दो दिन वर्चुअल कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक चरण में अधिवक्ताओं से सोमवार और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से घर से ही पैरवी करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए न्यायाधीशों के पद बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।

बोले— “मध्यप्रदेश डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का अग्रणी राज्य”

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में यह ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ जस्टिस” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

“अब 10 मिनट में हो जाती है रिहाई” 

जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह  ने कहा कि पहले जमानत आदेश के बाद कैदियों की रिहाई में कई दिन लग जाते थे, लेकिन डिजिटल सिस्टम के कारण अब यह प्रक्रिया कुछ मिनटों में पूरी होने लगी है।

“डिजिटल इकोसिस्टम से सूचना आदान-प्रदान आसान हुआ” 

जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में विलंब लंबे समय से संवैधानिक चिंता का विषय रहा है, लेकिन कोर्ट, पुलिस, जेल, फॉरेंसिक और मेडिको-लीगल सेवाओं के डिजिटल एकीकरण से यह समस्या काफी हद तक कम होगी।

इन सॉफ्टवेयर को CJI ने लांच किया 

  • ऑनलाइन क्रिमिनल जस्टिस इकोसिस्टम — आपराधिक मामलों के दस्तावेजों का डिजिटल एकीकरण, जिससे जमानत प्रकरणों के निराकरण में तेजी आएगी।
  • CLASS (Court Live Streaming System) — अदालतों की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग।
  • GIGW पोर्टल — वकीलों, याचिकाकर्ताओं और नागरिकों को विभिन्न न्यायिक सेवाएं एक मंच पर उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म।
  • PRATHAM (Precision Research and AI Technology for Holistic Archive Management) — एआई आधारित रिकॉर्ड और निर्णय संरक्षण प्रणाली।
  • IRAS (Inmate Release Automation System) — पैरोल और समयपूर्व रिहाई की गणना में मानवीय त्रुटियों को कम करने वाला सिस्टम।
  • संकेत वाणी — मूक-बधिर पक्षकारों को पैरालीगल वालंटियर्स की सहायता से त्वरित कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की पहल।

Post a Comment

Previous Post Next Post