हाईकोर्ट ने कोलकाता की कंपनी को राहत देने से किया इनकार, कहा- “अनुमतियां नहीं मिलें तो पट्टा छोड़ दें”
मिली थी 1307 हेक्टेयर जमीन
कोलकाता स्थित कंपनी आरसीसीपीएल प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2008 में सतना जिले की रघुराजनगर तहसील के ग्राम इतौरा में 1307 हेक्टेयर भूमि खनन लीज के लिए आवंटित की गई थी।
कंपनी का दावा था कि आवश्यक सरकारी अनुमतियां नहीं मिलने के कारण वह खनन कार्य शुरू नहीं कर सकी। इसके बावजूद सतना कलेक्टर कार्यालय ने 4 अक्टूबर 2024 को कंपनी को रॉयल्टी भुगतान के लिए डिमांड नोटिस जारी कर दिया।
इस नोटिस को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका हाईकोर्ट पहले ही 9 अप्रैल 2026 को खारिज कर चुका था। इसके बाद कंपनी ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए नई याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि न्यूनतम रॉयल्टी की गारंटी “अप्रत्यक्ष किराया” (Indirect Rent) की तरह होती है। यदि लीजधारक सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसे पट्टा छोड़ देना चाहिए।
कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की—
“यदि कंपनी विभागीय स्वीकृतियां मिलने तक पट्टा अपने पास बनाए रखती है, तो उसे अनुबंध की शर्तों के अनुसार न्यूनतम गारंटीकृत रॉयल्टी का भुगतान करना ही होगा।”
कंपनी को क्यों नहीं मिली राहत?
हाईकोर्ट ने माना कि लीज अपने पास बनाए रखने का अर्थ है कि कंपनी उस भूमि पर अधिकार बनाए रखना चाहती है। ऐसे में वह रॉयल्टी भुगतान की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती कि खनन कार्य शुरू नहीं हुआ।
फैसले के मायने
यह फैसला खनन लीज लेने वाली कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि लीज मिलने के बाद कंपनियां सिर्फ अनुमतियों का हवाला देकर रॉयल्टी भुगतान से बच नहीं सकतीं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें RP-800-2026
