एमपी हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला
इंदौर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित धार भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आज एक अत्यंत ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने स्पष्ट रूप से माना है कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप मूल रूप से देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर यानी 'भोजशाला' ही है।
अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को सर्वोपरि मानते हुए हिंदू पक्ष की याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है, जबकि मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों और याचिकाओं को खारिज कर दिया है। फैसले के तुरंत बाद धार सहित पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
ASI के वैज्ञानिक सर्वे और सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों पर भरोसा
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या मामले में तय किए गए सिद्धांतों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा:
"पुरातत्व (Archaeology) एक बहुविषयक और वैज्ञानिक विधा है। एएसआई (ASI) द्वारा की गई वैज्ञानिक स्टडी और 2000 से अधिक पन्नों की सर्वे रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अदालत पूरी तरह भरोसा करती है। ऐतिहासिक साक्ष्यों और राजा भोज (परमार राजवंश) के काल के साहित्य से यह साफ है कि यह स्थान संस्कृत अध्ययन का केंद्र 'भोजशाला' था।"
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि विवादित स्थल पर हिंदुओं द्वारा की जाने वाली पूजा की निरंतरता समय के साथ विनियमित (Regulated) तो हुई, लेकिन वह कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी।
हाई कोर्ट के 5 सबसे बड़े निर्देश
1. 2003 का एएसआई आदेश पूरी तरह रद्द
साल 2003 में एएसआई द्वारा एक व्यवस्था बनाई गई थी, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी। हाई कोर्ट ने इस आदेश को पूरी तरह क्वैश (रद्द) कर दिया है। अब वहां केवल हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार रहेगा।
2. एएसआई के पास रहेगा पूर्ण नियंत्रण
भोजशाला परिसर 18 मार्च 1904 से ही 1958 के अधिनियम के तहत एक संरक्षित स्मारक है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि भारत सरकार और एएसआई (ASI) मिलकर इस परिसर के प्रशासन, प्रबंधन और वहां संस्कृत अध्ययन को फिर से शुरू करने का निर्णय लेंगे।
3. वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से लाने का रास्ता साफ
याचिकाकर्ताओं (हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस) की मांग थी कि लंदन के म्यूजियम में रखी मां सरस्वती (वाग्देवी) की मूल प्रतिमा को वापस लाया जाए। कोर्ट ने इस पर कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही केंद्र सरकार को प्रतिवेदन दे चुके हैं, इसलिए भारत सरकार इस पर सकारात्मक विचार कर सकती है।
4. मुस्लिम पक्ष को मिलेगी अलग जमीन
मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि प्रतिवादी (मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी या वक्फ संस्था) धार जिले में मस्जिद या प्रार्थना स्थल के लिए आवेदन देती है, तो राज्य सरकार कानून के मुताबिक उन्हें एक उपयुक्त और स्थायी भूमि आवंटित करने पर विचार करे।
5. अन्य सभी याचिकाएं खारिज
कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमालुद्दीन सोसाइटी) की रिट याचिका, काजी जकुल्लाह की रिट अपील और जैन समुदाय से जुड़ी सालेक चंद जैन की याचिका को पूरी तरह खारिज (Dismiss) कर दिया है।
वकीलों की सराहना भी की
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई पिछले काफी समय से नियमित चल रही थी। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं सलमान खुर्शीद, एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह, सुनील जैन, और हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन व अन्य की सराहना की कि उन्होंने इतने संवेदनशील मुद्दे पर बेहद गरिमापूर्ण, शांत और सौहार्दपूर्ण माहौल में बहस पूरी की।
हाईकोर्ट का फैसला देखें WP-10497-2022
