LAW'S VERDICT

सीएम हाउस के पास से हटेंगे अतिक्रमण, पर पहले करना होगा पुनर्वास

‘तीन पीढ़ियों से रहने का दावा मालिकाना हक के लिए पर्याप्त नहीं’,  हाईकोर्ट से 26 मजदूरों की अपील खारिज 

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी भोपाल के पॉश इलाके श्यामला हिल्स में स्थित सीएम हाउस के पास वर्षों से रह रहे अतिक्रमणकारियों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल लंबे समय से रहने या तीन पीढ़ियों से निवास करने का दावा, जमीन पर मालिकाना हक स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। हालांकि अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि अतिक्रमण हटाने से पहले राज्य सरकार को प्रभावित लोगों के पुनर्वास (Rehabilitation) की उचित व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।किए 

सीएम हाउस की पास जमीन का है मामला 

भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में सीएम हाउस के पास स्थित जमीन पर लंबे समय से कुछ परिवार रह रहे थे। इन लोगों ने दावा किया कि वे तीन पीढ़ियों से वहां बसे हुए हैं और उन्हें वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के तहत पारंपरिक निवासी माना जाए। इस संबंध में मान सिंह व अन्य की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसे पहले खारिज कर दिया गया था। इसके खिलाफ 26 मजदूरों ने रिट अपील दाखिल की थी।

हाईकोर्ट से मालिकाना हक का दावा खारिज

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं से जमीन के स्वामित्व या लीज से जुड़े दस्तावेज मांगे। लेकिन याचिकाकर्ता कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सके। इस पर कोर्ट ने कहा:

  • केवल लंबे समय से रहने से कानूनी स्वामित्व (Legal Ownership) नहीं बनता।
  • बिना वैध पट्टा या आवंटन के जमीन पर अधिकार का दावा मान्य नहीं हो जाता।
  • पहले के निचली कोर्ट में सिविल विवाद में भी याचिकाकर्ता मुकदमा हार चुके हैं।

इसी आधार पर कोर्ट ने रिट अपील खारिज कर दी और अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ कर दिया।

‘फेयर प्ले’ सिद्धांत: पुनर्वास जरूरी

हालांकि कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मालिकाना हक का दावा खारिज किया, लेकिन मानवीय पहलू को नजरअंदाज नहीं किया। अदालत ने ‘फेयर प्ले’ (Fair Play) के सिद्धांत को लागू करते हुए कहा:

  • सरकार को बेदखली की कार्रवाई से पहले पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी।
  • प्रभावित लोगों को बुनियादी सुविधाएं (Basic Amenities) उपलब्ध कराई जाएं।
  • पुनर्वास नीति के तहत सभी प्रभावितों को उचित सहायता दी जाए।

राज्य के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार अपनी नीति के अनुसार पुनर्वास सहायता प्रदान करेगी।

वन अधिकार अधिनियम पर कोर्ट का संकेत

याचिकाकर्ताओं ने खुद को पारंपरिक वन निवासी बताते हुए वन अधिकार अधिनियम का हवाला दिया था। लेकिन कोर्ट ने संकेत दिया कि इस अधिनियम का लाभ लेने के लिए दस्तावेजी प्रमाण और पात्रता शर्तें जरूरी हैं। केवल मौखिक दावा या लंबे समय से निवास पर्याप्त नहीं हैं।

प्रदेश में अतिक्रमण नीति पर असर

यह फैसला मध्य प्रदेश में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियानों पर भी प्रभाव डाल सकता है। अब प्रशासन को:

  • सीधे कार्रवाई से पहले पुनर्वास योजना तैयार करनी होगी।
  • प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
  • कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। 
हाईकोर्ट का आदेश देखें  WA-1442-2026

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