LAW'S VERDICT

हाईकोर्ट का सख्त संदेश: एमएससी नर्सिंग में ‘बैकडोर एंट्री’ नहीं, याचिका खारिज

‘काउंसिलिंग के बाद दाखिला देना सिस्टम में अराजकता फैलाएगा’, रीवा की छात्रा को राहत से इनकार

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमएससी नर्सिंग (MSc Nursing Admission) में नियमों को दरकिनार कर दाखिला देने की मांग को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘बैकडोर एंट्री’ की अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि इस स्तर पर किसी एक अभ्यर्थी को राहत दी गई, तो इससे पूरे एडमिशन सिस्टम में अराजकता (Chaos) फैल जाएगी।

रीवा की छात्रा ने लगाई थी याचिका 

रीवा की नर्सिंग ऑफिसर पूजा सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि:

  • दो राउंड की काउंसिलिंग के बाद भी उसे एमएससी नर्सिंग में दाखिला नहीं मिला
  • कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली हैं
  • उसे किसी भी कॉलेज में प्रवेश देने का निर्देश दिया जाए

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि अधिकारियों को आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान अहम सवाल उठाए:

  • किस कानून के तहत याचिकाकर्ता ऐसी राहत मांग रही है?
  • क्या काउंसिलिंग प्रक्रिया के बाद भी प्रवेश दिया जा सकता है?

कोर्ट ने कहा:

  • अंतिम काउंसिलिंग 31 दिसंबर 2025 को पूरी हो चुकी है
  • शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है
  • इस चरण पर प्रवेश देना नियमों के खिलाफ है

इसलिए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी

‘बैकडोर एंट्री’ पर कोर्ट का स्पष्ट रुख

कोर्ट ने स्पष्ट किया:

  • प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित नियमों और समयसीमा के अनुसार ही होनी चाहिए
  • किसी एक उम्मीदवार को विशेष राहत देना अन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा
  • इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होगी

अदालत ने कहा कि ऐसी अनुमति देने से पूरे एडमिशन सिस्टम में अराजकता फैल सकती है

अयोग्य उम्मीदवारों को दाखिले का आरोप

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कई अयोग्य उम्मीदवारों को एमएससी नर्सिंग में प्रवेश दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा:यदि ऐसा है, तो याचिकाकर्ता अलग से याचिका दायर कर उन दाखिलों को चुनौती दे सकती है, लेकिन मौजूदा याचिका के तहत राहत नहीं दी जा सकती। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिषेक सिंह ने दलीलें प्रस्तुत कीं और काउंसिलिंग प्रक्रिया के पूर्ण होने की जानकारी दी।

छात्रों के लिए क्या है सीख

इस फैसले से छात्रों को यह स्पष्ट संदेश मिलता है:

  • काउंसिलिंग प्रक्रिया को गंभीरता से लें
  • समयसीमा के भीतर ही सभी विकल्पों का उपयोग करें
  • बाद में कोर्ट से राहत की उम्मीद सीमित होती है


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-9218-2026

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