13 मौतों के बाद दायर हुई जनहित याचिका, 11 मई को होगी सुनवाई
याचिका में दावा किया गया है कि 30 अप्रैल 2026 को बरगी डैम में तेज आंधी-तूफान के दौरान क्रूज बोट पलटने से कम से कम 13 लोगों की मौत हो चुकी है।
ओवरलोडिंग और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप
PIL में कहा गया है कि क्रूज में 43 से 47 यात्री सवार थे, जबकि केवल 29 टिकट जारी किए गए थे। इससे स्पष्ट रूप से ओवरलोडिंग का मामला सामने आता है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गईं, जो गंभीर सुरक्षा चूक है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद चला क्रूज
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 29 अप्रैल को तेज हवाओं और खराब मौसम की चेतावनी जारी की थी। इसके बावजूद पर्यटन विभाग ने क्रूज सेवा बंद नहीं की। याचिका में इसे प्रशासन और संबंधित विभागों की “घोर लापरवाही” बताया गया है।
कानून और गाइडलाइन उल्लंघन का आरोप
PIL में कहा गया है कि यह हादसा Inland Vessels Act 2021 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की वर्ष 2017 की बोट सेफ्टी गाइडलाइंस के खुले उल्लंघन का परिणाम है।
याचिका में निम्न प्रमुख उल्लंघनों का उल्लेख किया गया है:
- ओवरलोडिंग रोकने के नियमों की अनदेखी
- लाइफ जैकेट अनिवार्यता का पालन नहीं
- खराब मौसम में भी बोट संचालन जारी रखना
NGT और सुप्रीम कोर्ट आदेशों की अवहेलना का दावा
याचिकाकर्ता ने कहा कि बरगी डैम क्षेत्र को वेटलैंड क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां मोटरबोट संचालन पर रोक संबंधी निर्देश पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद क्रूज संचालन जारी रखा गया, जो न्यायालयीय आदेशों की अवमानना के समान है।
हाईकोर्ट से की गईं मांग
याचिका में हाईकोर्ट से कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी करने की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
- पूरे मध्यप्रदेश में टूरिस्ट बोट और क्रूज सेवाओं पर तत्काल रोक
- सभी जल पर्यटन स्थलों का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट
- नई सुरक्षा नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करना
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई
सरकार ने बैठाई जांच
राज्य सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि केवल जांच पर्याप्त नहीं है। जब तक सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए जाते, तब तक इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
बरगी डैम हादसे के बाद प्रदेश में जल पर्यटन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। यह जनहित याचिका अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता के माध्यम से दाखिल हुई है।
