LAW'S VERDICT

महिआओं के हित में हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: इंदौर बार एसोसिएशन में महिलाओं को दो 30% आरक्षण

फैसले का प्रदेश के सभी बार एसोसिएशनों पर पड़ेगा असर, कोर्ट ने कोषाध्यक्ष समेत 3 पद महिलाओं के लिए तय किए

इंदौर। मप्र हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से महिला वकीलों के लिए राहत भरी बड़ी खबर आई है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इंदौर में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने इस फैसले में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बार एसोसिएशनों में महिला वकीलों को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी के तहत इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में तीन पद महिलाओं के लिए सुनिश्चित किए जाएं। यह फैसला इंदौर बार में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे नेतृत्व पदों पर महिलाओं की उपस्थिति मजबूत होगी और प्रदेश भर के अन्य बार एसोसिएशनों पर भी इसका असर पड़ेगा।

डिवीज़न बेंच ने यह ऐतिहासिक फैसला इंदौर की अधिवक्ता रेखा बोरीवाल की याचिका पर सुनाया। हालाँकि मामले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ, लेकिन कोर्ट ने Ms. Deeksha N Amruthesh बनाम Karnataka प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सभी बार एसोसिएशनों में महिला अधिवक्ताओं को ऑफिस बेयरर्स या एग्जीक्यूटिव में 30% प्रतिनिधित्व दिया जाना अनिवार्य है। जिन बार एसोसिएशनों के चुनाव अभी बाकी हैं, वहां चुनाव इसी व्यवस्था के साथ होंगे। जहां चुनाव हो चुके हैं, वहां आवश्यक संख्या में महिला अधिवक्ताओं को नामांकित किया जाएगा।

इंदौर बार में 9 सदस्यीय कार्यकारिणी

कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इंदौर की कार्यकारिणी कुल 9 सदस्यों की है। इसमें चार पदाधिकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के हैं। इसके अलावा पांच सदस्य कार्यकारिणी सदस्य भी हैं।

महिला के लिए आरक्षित रहेगा कोषाध्यक्ष पद 

अपने फैसले में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया है कि कार्यकारिणी में एक नया कोषाध्यक्ष का पद भी बनाया जाए, जो महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित रहेगा। दो Member Executive पद भी महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित किए जाएं। कुल तीन महिला प्रतिनिधि नामांकित किए जाएं, जिससे 30% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

दो सप्ताह में पूरी होगी प्रक्रिया

कोर्ट ने इंदौर के मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के Administrative Judge से कहा है कि बार एसोसिएशन से परामर्श कर दो सप्ताह के भीतर तीन महिला अधिवक्ताओं का नामांकन करें। इनका कार्यकाल वर्तमान निर्वाचित कार्यकारिणी के कार्यकाल तक रहेगा।

अगले चुनाव में आरक्षित होंगे पद

कोर्ट ने यह भी कहा कि बार एसोसिएशन अपने नियमों में संशोधन करे और जनवरी 2027 में होने वाले अगले चुनाव में Treasurer तथा दो Executive Member पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखे।

अनुभव सीमा बदलने की मांग पर क्या कहा?

याचिकाकर्ता ने बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में कार्यकारिणी सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए तय न्यूनतम प्रैक्टिस अनुभव सीमा कम करने की मांग भी की गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह फैसला बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी कानून के अनुसार स्वयं ले सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का क्या था फैसला 

सुप्रीम कोर्ट ने Ms. Deeksha N Amruthesh बनाम Karnataka केस में कहा था कि जिन बार एसोसिएशनों के चुनाव अभी होने बाकी हैं, वहां चुनाव इस तरह कराए जाएं कि महिला वकीलों को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले। वहीं जिन बार एसोसिएशनों में चुनाव पहले ही हो चुके हैं, वहां संबंधित हाईकोर्ट के Registrar General of the High Court यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्यकारिणी में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी कुल कार्यकारिणी शक्ति का कम से कम 30 प्रतिशत हो।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है that संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट के Administrative Judge या Portfolio Judge, संबंधित District & Sessions Court के जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा बार एसोसिएशन से परामर्श कर पर्याप्त संख्या में महिला वकीलों को कार्यकारिणी में नामांकित करें, ताकि महिलाओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

हाईकोर्ट का फैसला देखें    WP-2319-2026


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