आरक्षण की अधिसूचना के पक्ष-विपक्ष में मप्र हाईकोर्ट ने तय किया सुनवाई का पैमाना
जबलपुर। Madhya Pradesh High Court में मध्यप्रदेश के OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के मामले में आज से अहम सुनवाई शुरू होगी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सोमवार को सुनवाई के लिए स्पष्ट पैमाना तय कर दिया। हालांकि सुनवाई सोमवार को दोपहर को 12:30 बजे से होना थी, जो अपरिहार्य कारणों के चलते शाम 4:30 बजे से शुरू हुई। डिवीज़न बेंच ने कहा कि मामले में दो तरह की याचिकाएं हैं। एक पक्ष 27 प्रतिशत OBC आरक्षण अधिसूचना के विरोध में है, जबकि दूसरा पक्ष इसके समर्थन में है। इसी आधार पर मंगलवार और बुधवार को सुनवाई की जाएगी।
आज विरोध पक्ष रखेगा दलीलें
डिवीजन बेंच के आदेश के अनुसार मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक 27 प्रतिशत आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई होगी। अशिता दुबे और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी अपनी दलीलें पेश करेंगे।
कमलनाथ सरकार के फैसले को चुनौती
गौरतलब है कि मप्र की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने OBC वर्ग के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इसके लिए 8 जुलाई 2019 को विधानसभा में बिल पारित किया गया था और 17 जुलाई 2019 को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आरक्षण प्रतिशत बढ़ाना असंवैधानिक है और भारत के सर्वोच्च न्यायलय द्वारा तय 50 प्रतिशत सीमा संबंधी दिशानिर्देशों के विपरीत है।
कोर्ट ने कहा—पहले सुनवाई का ढांचा जरूरी
सोमवार को सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि इतने बड़े संवैधानिक मुद्दे पर व्यवस्थित सुनवाई जरूरी है, इसलिए पहले सुनवाई का पैमाना तय करना आवश्यक था। सभी पक्षों की सहमति से सुनवाई की प्रक्रिया तय कर दी गई।
स्पेशल काउंसिल पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पूछा कि कौन-कौन से अधिवक्ता किस पक्ष से दलीलें रखेंगे। जब बेंच को बताया गया कि सरकार द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता विनायक शाह सरकार के विरोध में दलील रखना चाहते हैं, तो कोर्ट ने नाराजगी जताई। बेंच ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने किसी अधिवक्ता को स्पेशल काउंसिल नियुक्त किया है, तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी सरकार का पक्ष रखना है। हालाँकि अधिवक्ता श्री शाह ने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा ओबीसी वर्ग के संवैधानिक हितों की रक्षा करना है। इस पर कोर्ट ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई करने को कहा।
मध्यप्रदेश की राजनीति और भर्ती प्रक्रिया पर असर
OBC आरक्षण का यह मामला मध्यप्रदेश की राजनीति, सरकारी भर्तियों और आरक्षण व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। लाखों उम्मीदवारों हाईकोर्ट के आने वाले फैसले से सीधे तौर पर जुड़े हैं। उन सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित फैसले पर टिकी हैं।
