LAW'S VERDICT

वंदे मातरम् का अपमान पड़ा भारी: इंदौर नगर निगम की दो महिला पार्षदों को हाईकोर्ट का नोटिस

अधिवक्ता की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने माँगा जवाब, सुनवाई 11 मई को 

इंदौर। “वंदे मातरम्” के कथित अपमान को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इंदौर नगर निगम की दो महिला पार्षदों (रुबीना इक़बाल खान और फौजिया शेख अलीम ) को नोटिस जारी किया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने इस मामले को गंभीर संवैधानिक प्रश्नों से जुड़ा बताते हुए महिला पार्षदों के साथ प्रदेश सरकार के गृह सचिव व अन्य से जवाब तलब किया है।

इंदौर की अधिवक्ता योगेंद्र हेमनानी को ओर से दाखिल इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम की 8 अप्रैल 2026 को हुई एक आधिकारिक बैठक के दौरान दोनों महिला पार्षदों ने “वंदे मातरम्” के गायन में भाग लेने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उन पर बैठक के दौरान ऐसा व्यवहार करने का भी आरोप है, जिससे राष्ट्रीय गीत के प्रति असम्मान झलकता है। इस घटना को याचिकाकर्ता ने न केवल अनुचित, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के विपरीत बताया है। 

इस जनहित याचिका में एक व्यापक मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान में ऐसे मामलों के लिए कोई स्पष्ट और बाध्यकारी दिशा-निर्देश मौजूद नहीं हैं, जो यह तय करें कि आधिकारिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों का आचरण कैसा होना चाहिए, विशेषकर राष्ट्रीय गीत जैसे विषयों पर।

याचिका में संविधान सभा की 24 जनवरी 1950 की कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गान “जन गण मन” के समान सम्मान देने की बात कही गई थी। इस ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर यह तर्क दिया गया है कि राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बनाए रखना न केवल नैतिक, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है।

याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष खुद रखते हुए कोर्ट में दलील दी कि यह कृत्य संविधान के अनुच्छेद 51A(a) का उल्लंघन है, जो प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का कर्तव्य सौंपता है। साथ ही यह भी कहा गया कि इस प्रकार का आचरण Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत दंडनीय हो सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रारंभिक रूप से इसे गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रद्युम्न किबे ने नोटिस स्वीकार किया। वहीं नगर निगम की पार्षद रुबीना इक़बाल खान और फौजिया शेख अलीम को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से नोटिस भेजने के निर्देश दिए गए हैं। 

हाईकोर्ट का आदेश देखें        WP-13537-2026

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