सेमरिया विधानसभा सीट से हुए निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करने की थी मांग
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की सियासत में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को सर्वोच्च न्यायालय से भी बड़ा झटका लगा है। इससे पहले सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मिश्रा की वह आपत्ति मप्र हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दाखिल चुनाव याचिका को निरस्त करने की मांग की थी। मप्र हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अभय मिश्रा की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने वापस लेने पर खारिज कर दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अभय मिश्रा को स्वतंत्रता दी है कि वे सीपीसी और जन प्रतिनिधिनित्व क़ानून में उपलब्ध विकल्पों का सहारा लेने स्वतंत्र हैं।
यह पूरा मामला रीवा जिले की सेमरिया सीट से जुड़ा है, जहां वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अभय मिश्रा ने जीत दर्ज की थी। उनके खिलाफ भाजपा प्रत्याशी कृष्ण पति त्रिपाठी ने उनके निर्वाचन के खिलाफ एक चुनाव याचिका मप्र हाईकोर्ट में दायर की थी। इस चुनाव याचिका में मिश्रा द्वारा नामांकन के दौरान दिए गए आपराधिक रिकॉर्ड के शपथपत्र पर सवाल उठाए थे। मिश्रा की ओर से दाखिल आपत्ति पर सुनवाई करते हुए मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने माना था कि यह याचिका “परेशान करने वाली” (vexatious) नहीं है और इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ संकेत दिया था कि मामले में गंभीर मुद्दे हैं, जिनकी विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। हाईकोर्ट से आपत्ति ख़ारिज होने पर विधायक अभय मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में यह मामला दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान कांग्रेस विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कृष्णपति त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल और अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोई भी राहत न दिए जाने पर अभय मिश्रा की ओर से याचिका वापस ले ली गई।
अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट में कृष्ण पति त्रिपाठी की चुनाव याचिका पर होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस चुनाव विवाद का रुख किस दिशा में आगे बढ़ता है।
