हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा- हादसों को रोकने सुझाव दें, जिनका सरकार एक्सपर्ट्स से परीक्षण कराये
पूर्व RAS अधिकारी ने दायर की PIL
यह जनहित याचिका राजस्थान के पूर्व RAS अधिकारी महावीर सिंह ने दायर की है। फिलहाल मप्र के डिंडोरी जिले में रह रहे याचिकाकर्ता ने बताया कि वे सेवानिवृत्ति के बाद Rajasthan सचिवालय के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग में Officer in Charge Road Safety War Room के रूप में कार्य कर चुके हैं। अक्टूबर 2021 से वे लगातार सड़क सुरक्षा के मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
पूर्व IAS, IPS, जज और विशेषज्ञों का समूह कर रहा काम
याचिका में बताया गया है कि सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा समूह कार्य कर रहा है, जिसमें सेवानिवृत्त IAS, RAS अधिकारी, पुलिस अधिकारी, NHAI अधिकारी, PWD इंजीनियर, RTO, DTO, न्यायिक अधिकारी, एनआरआई, पूर्व एयर वाइस मार्शल और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य सड़क हादसों को कम करना, सुरक्षित ट्रैफिक सिस्टम बनाना और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
कई अदालतों के आदेशों के बावजूद हालात नहीं सुधरे
याचिका में कहा गया है कि देश की विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण आदेश दे चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी पर्याप्त काम नहीं हुआ है। नतीजा यह है कि दुर्घटनाएं और मौतें लगातार बढ़ रही हैं।
मध्यप्रदेश में हालात चिंताजनक
याचिका में विशेष रूप से Madhya Pradesh का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यहां सड़क हादसों की संख्या बेहद चिंताजनक है। राज्य में दुर्घटनाओं और मौतों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हादसों के लिए कई पहलू हैं जिम्मेदार
याचिका में कहा गया है कि जनसंख्या और वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़क दुर्घटनाओं में भी तेजी आई है। इसके पीछे ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था की कमजोरी, उचित प्रशिक्षण का अभाव, सुरक्षा तंत्र की विफलता, मानवीय त्रुटियां, तकनीकी खामियां, प्रशासनिक लापरवाही, जागरूकता की कमी और कानून के कमजोर पालन जैसे कारण जिम्मेदार हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि सड़क सुरक्षा के लिए मजबूत नीति बनाई जाए, ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम सख्त किया जाए, ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ब्लैक स्पॉट्स सुधारे जाएं और प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाए।
सोमवार को हुई प्रारम्भिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रखा। सुनवाई के बाद बेंच ने नोटिस जारी कर याचिकाकर्ता को सुझाव पक्ष करने के निर्देश दिए।
